Hijab Controversy India: “हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बनेगी, ये दिवास्वप्न है”, ओवैसी की बेटी पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का तीखा बयान

Hijab Controversy India : देश के प्रसिद्ध कथावाचक और संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बेटी को लेकर दिए गए एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ओवैसी की हिजाब पहनने वाली बेटी के भविष्य में देश की प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को “दिवास्वप्न” करार दिया है। उनका यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं और सामाजिक चेतना बिल्कुल स्पष्ट हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर भविष्य में कोई महिला प्रधानमंत्री बनेगी, तो वह साड़ी पहनने वाली भारतीय महिला होगी। उनके इस बयान को सीधे तौर पर हिजाब और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

बयान से मचा राजनीतिक घमासान
रामभद्राचार्य के इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। कुछ लोग इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था और पहनावे पर टिप्पणी मानकर आलोचना कर रहे हैं।जगद्गुरु रामभद्राचार्य का कहना है कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है और देश का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति को उसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में महिला सशक्तिकरण का रास्ता परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से होकर गुजरता है।
ओवैसी परिवार पर टिप्पणी
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बेटी को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में राजनीतिक उत्तराधिकार, अल्पसंख्यक राजनीति और महिला नेतृत्व को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही हैं। हालांकि ओवैसी या उनकी पार्टी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लोग दो धड़ों में बंट गए हैं। एक वर्ग जहां इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान की बात बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे महिला की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है।कुछ यूज़र्स का कहना है कि प्रधानमंत्री बनने की योग्यता पहनावे से नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता से तय होती है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि भारत की परंपराओं का सम्मान करना भी नेतृत्व का अहम हिस्सा है।
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