महोबा : जेल में निरुद्ध बंदी ने पुलिस सुरक्षा में इंटरमीडिएट परीक्षा देकर सबको सोचने पर मजबूर किया

✍️By: Nation Now Samachar Desk
महोबा में जेल में निरुद्ध बंदी ने पुलिस सुरक्षा में इंटरमीडिएट परीक्षा देकर सबको सोचने पर मजबूर किया

REPORT- चन्द्रशेखर नामदेव महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने सभी को हैरत में डाल दिया। नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में जेल में निरुद्ध चल रहे बंदी धीरेन्द्र ने पुलिस सुरक्षा में इंटरमीडिएट की परीक्षा देकर यह साबित कर दिया कि शिक्षा की चाह किसी भी बाधा से नहीं रोकी जा सकती।

पुलिस सुरक्षा में परीक्षा देने पहुंचे बंदी

कबरई थाना क्षेत्र के सिंघनपुर बघारी गांव के रहने वाले धीरेन्द्र पर नाबालिग किशोरी से छेड़छाड़ का आरोप था। लगभग पांच दिन पहले उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस अभिरक्षा में जिला कारागार भेजा गया।जेल में रहते हुए धीरेन्द्र ने न्यायालय में अपील की कि वह इंटरमीडिएट की परीक्षा देना चाहता है। न्यायालय के आदेशानुसार जेल प्रशासन ने उसे सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान कीं और पुलिस सुरक्षा में उसे श्रीनगर कस्बा के राजकीय इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र तक पहुँचाया।

छात्र-छात्राओं और समाज के लिए मिसाल

परीक्षा केंद्र पहुंचते ही धीरेन्द्र को देखकर अन्य छात्र और छात्राएँ चकित रह गए। यह नजारा समाज के लिए भी प्रेरणादायक साबित हुआ। डिप्टी जेलर रामसिया ने बताया कि जेल नियमावली के तहत धीरेन्द्र को पढ़ाई और परीक्षा देने की सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं।धीरेन्द्र का यह साहस यह संदेश देता है कि भले ही जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ हों, लेकिन शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा किसी भी दीवार या रोक से नहीं रुक सकती। कहा जाता है कि “कितनी भी बंदिशें लग जाएं, अगर मन में शिक्षा की लालसा हो तो उसे कोई भी रोक नहीं सकता।”जैसे बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने कहा था, शिक्षा वह शक्ति है जो व्यक्ति को आगे बढ़ने में सक्षम बनाती है।धीरेन्द्र की यह कहानी समाज और युवाओं के लिए एक मिसाल बनकर सामने आई है कि शिक्षा के प्रति लगन और प्रयास हर परिस्थिति में संभव है।

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