Mahashivratri 2026: कानपुर का खेरेश्वर मंदिर, महाभारत काल से जुड़ा अद्भुत शिवालय जहाँ रोजाना होती है अश्वत्थामा पूजा

✍️By: Nation Now Samachar Desk
कानपुर का खेरेश्वर मंदिर: महाभारत काल से जुड़ा अद्भुत शिवालय जहाँ रोजाना होती है अश्वत्थामा पूजा

Mahashivratri 2026: कानपुर, उत्तर प्रदेश: कानपुर शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर Shivrajpur क्षेत्र में स्थित Khereshwar Mandir अपने अनोखे इतिहास और रहस्यमयी पूजा-अर्चना के लिए प्रसिद्ध है। यह शिव मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है और कहा जाता है कि यहाँ प्रतिदिन सबसे पहली पूजा स्वयं अश्वत्थामा करते हैं।मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही शिवलिंग पर अद्भुत पुष्प, अगरबत्ती और चंदन चढ़ा होता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह रहस्य आज भी विज्ञान के लिए अज्ञात है।

महाशिवरात्रि और श्रद्धालुओं का हुजूम

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर खेरेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। दूर-दूर के शहरों से भी लोग यहाँ आकर शिवलिंग के दर्शन और अश्वत्थामा की पूजा अर्चना का अनुभव करते हैं। मंदिर के महंत और श्रद्धालुओं के अनुसार, इस मंदिर में आने वाली हर मुराद पूरी होती है।“जहाँ विज्ञान फेल हो जाता है, वहाँ आध्यात्मिक आस्था मजबूत होती है। यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।”

अश्वत्थामा और उनका रहस्य

महाभारत के युद्ध में अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों का वध किया था। इसके बाद भीम ने उनके माथे पर लगी मणि निकाल दी थी और श्रीकृष्ण ने उन्हें श्राप दिया कि वह तब तक जीवित रहेंगे जब तक महादेव उन्हें मुक्ति न दें।ऐसा माना जाता है कि तब से लेकर आज तक अश्वत्थामा जीवित हैं और उनके कई दर्शन विभिन्न स्थानों पर हुए हैं। खेरेश्वर मंदिर में रात के समय जब मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, तो सुबह आने वाले श्रद्धालुओं से पहले शिवलिंग पर पूजा अर्चना की हुई मिलती है। यही पूजा स्वयं अश्वत्थामा द्वारा की जाती है।

महाभारत और द्वापर युग से जुड़ा इतिहास

खेरेश्वर मंदिर का इतिहास द्वापर युग और महाभारत से जुड़ा है। कहा जाता है कि कौरव और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने भी यहाँ तपस्या की थी। मंदिर में शिवलिंग के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को अश्वत्थामा के नाम से पूजा करनी होती है, तभी उनकी मुरादें पूरी होती हैं। मंदिर लगभग 5000 साल पुराना माना जाता है।प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ होती है। मांगी गई हर मुराद पूरी होने की मान्यता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि अश्वत्थामा आज भी अजर-अमर हैं और धरती पर मौजूद हैं। यही वजह है कि खेरेश्वर मंदिर की आस्था लोगों के दिलों में हर रोज बढ़ती जा रही है।

उत्तर प्रदेश से और खबरें