गाजियाबाद में पिंक बूथ इंचार्ज महिला SI और सिपाही गिरफ्तार, 50 हजार की रिश्वत लेते दबोचे

✍️By: Nation Now Samachar Desk
गाजियाबाद: मुरादनगर में रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ी गई महिला सब-इंस्पेक्टर, एंटी करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

गाजियाबाद उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र से भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां दहेज एक्ट के एक केस में रिश्वत मांगने के आरोप में महिला सब-इंस्पेक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

यह कार्रवाई एंटी करप्शन ब्यूरो मेरठ की टीम ने की, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) December 21, 2025

दहेज एक्ट के मुकदमे में नाम हटाने के बदले मांगी रिश्वत

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न (Dowry Act) के तहत FIR दर्ज की गई थी, जिसमें सास और ससुर के नाम भी शामिल थे। आरोप है कि मामले की जांच कर रहीं महिला सब-इंस्पेक्टर ने एफआईआर से नाम निकालने के एवज में 2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। पीड़ित परिवार इस भारी रकम से परेशान हो गया और उसने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से कर दी।

सौदा 50 हजार में तय, फिर बिछा जाल

शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो मेरठ की टीम ने पूरी योजना के तहत जाल बिछाया। बातचीत के दौरान महिला सब-इंस्पेक्टर 2 लाख की मांग से घटकर 50 हजार रुपये लेने पर राजी हो गई। तय योजना के अनुसार जैसे ही रिश्वत की रकम ली गई, उसी समय एंटी करप्शन टीम ने छापा मारकर महिला सब-इंस्पेक्टर को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई में एक अन्य पुलिसकर्मी भी पकड़ा गया, जो इस सौदे में कथित रूप से शामिल था।

पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

महिला सब-इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही गाजियाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई और दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस तरह की रिश्वतखोरी के और मामले तो सामने नहीं आ सकते।

सख्त कार्रवाई के संकेत

सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिला सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

जनता में आक्रोश, सिस्टम पर सवाल

इस घटना के बाद आम लोगों में गुस्सा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो पुलिस न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाती है, वही अगर रिश्वत मांगने लगे तो पीड़ित कहां जाए? मुरादनगर का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निगरानी और कार्रवाई कितनी जरूरी है।

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