पूर्व IAS दिव्या मित्तल की UP की राजनीति में एंट्री: बोलीं- डरूंगी नहीं, 80 सालों का हिसाब मांगूंगी

✍️NNS Desk
पूर्व IAS दिव्या मित्तल की UP की राजनीति में एंट्री: बोलीं- डरूंगी नहीं, 80 सालों का हिसाब मांगूंगी

UP की पूर्व IAS दिव्या मित्तल राजनीति में उतरेंगी. उन्होंने मंगलवार सुबह 8.30 बजे फेसबुक पर वीडियो जारी करके इसका खुलासा किया. उन्होंने कहा- यूपी में ही रहूंगी. डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी. मुझे पैसा और बाहुबल नहीं चाहिए. सिर्फ आप लोगों का साथ चाहिए.

उन्होंने कहा- “मैं किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ूंगी. अकेले चलूंगी. मेरा मकसद राजनेता बदलना नहीं, बल्कि पूरी राजनीति को बदलना है. हमारी राजनीति में सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है, लेकिन सोच नहीं है. मुझे अपने देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए.”

2013 बैच की IAS रहीं दिव्या ने 30 अगस्त को नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. 14 सितंबर को उनका इस्तीफा मंजूर हो गया था. तभी से उनके फ्यूचर प्लान को लेकर कयास लगाए जा रहे थे. दिव्या ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA करने के बाद लंदन में लाखों के पैकेज वाली नौकरी की थी.

उत्तर प्रदेश से शुरू होगी नई पारी: दिव्या मित्तल ने कहा कि उत्तर प्रदेश उनके लिए सिर्फ एक कार्यस्थल नहीं रहा, बल्कि यहां के लोगों ने उन्हें परिवार का हिस्सा माना. उन्होंने कहा कि वह एक अधिकारी के तौर पर उत्तर प्रदेश आई थीं, लेकिन यहां के लोगों ने उन्हें बेटी की तरह अपनाया. इसी वजह से वह अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी उत्तर प्रदेश से करना चाहती हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश के इतिहास और सामाजिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रदेश ने कई मौकों पर देश को दिशा दी है. उन्होंने लोगों से कहा कि वे किसी एक व्यक्ति को मसीहा मानकर इंतजार न करें. उनके मुताबिक, बदलाव की शुरुआत लोगों को खुद करनी होगी.

मुझे आवाज बनना है: दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके लिए राजनीति किसी पद तक पहुंचने का माध्यम नहीं होगी. उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती और पहुंचने के बाद भी कई बार सुनी नहीं जाती. उन्होंने कहा कि देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी कई बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं और वह इन समस्याओं का जवाब चाहती हैं. इसी संदर्भ में उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के कई अनुभवों का जिक्र किया. सबसे पहले उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह इलाके की एक महिला से हुई मुलाकात का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, वह पहाड़ी इलाके में पानी पहुंचाने के काम का निरीक्षण कर रही थीं. इसी दौरान एक महिला उनके पास आई और उसने अपनी समस्या बताई. दिव्या मित्तल के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि महिला पेंशन, आवास या पानी जैसी किसी सुविधा की मांग करेगी, लेकिन महिला ने गांव में स्कूल की अगली कक्षा शुरू कराने की मांग की. महिला ने बताया कि गांव में स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक है और उसके बाद बच्चों की पढ़ाई आगे जारी रखने में बड़ी परेशानी होती है. दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्होंने स्कूल से जुड़े नियमों और स्वीकृति की प्रक्रिया को देखा. उनके मुताबिक, स्कूल को मंजूरी भी मिली, लेकिन तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हो सका. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम और स्वीकृति मौजूद थे तो काम क्यों नहीं हुआ. उनके शब्दों में, समस्या संसाधनों की नहीं बल्कि इरादे की थी.

सरकारी जमीन और एक पन्नी में रखे कागज की कहानी: दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का एक और मामला साझा किया. उन्होंने बताया कि विशेष सचिव राजस्व रहते हुए एक व्यक्ति उनसे मिला था. उसके पास सरकारी जमीन के पट्टे से जुड़े दस्तावेज एक पन्नी में रखे थे. उनके मुताबिक, व्यक्ति को जमीन का पट्टा तो मिल गया था, लेकिन वास्तविक कब्जा नहीं मिला. उन्होंने दस्तावेजों की जांच कराई तो संबंधित रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई. दिव्या मित्तल ने कहा कि संबंधित अधिकारी से बात करने के बाद रिपोर्ट वापस कराई गई और रिपोर्ट तैयार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. इसके बाद मामला जमीन पर कब्जा दिलाने का था. उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से बात करने के बावजूद उन्हें यह जवाब मिला कि ‘ऊपर से मना किया गया है.’ इसी बात को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ‘ऊपर’ कौन है. उन्होंने कहा कि संविधान में जनता को सर्वोच्च माना गया है, इसलिए किसी व्यक्ति को अपने अधिकार के लिए सिफारिश और फोन का सहारा क्यों लेना पड़े.

सड़क, पुल और गड्ढों का भी उठाया मुद्दा: दिव्या मित्तल ने ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क और पुल की समस्याओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश में ऐसे हजारों गांव हैं जहां अब भी सड़क या पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है. उन्होंने कहा कि बरसात में कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है और लोग वर्षों से इंतजार करते रहते हैं. वहीं जिन जगहों पर सड़कें बनी हैं, वहां गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं. उन्होंने इस समस्या को केवल सड़क की खराब स्थिति से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि जवाबदेही का सवाल उठाया. उनका कहना था कि अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को कई बार यह पता होता है कि सड़क की स्थिति क्या है और किस जगह पर समस्या है, लेकिन कार्रवाई में देरी होती है. उन्होंने कहा कि ऐसी मौतों को केवल हादसा मानकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है और वह इन मामलों में जवाबदेही की बात करना चाहती हैं.

पेपर लीक और युवाओं के भविष्य का सवाल: अपने संबोधन में दिव्या मित्तल ने युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार की लड़की के रूप में उन्होंने शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने का मौका पाया, लेकिन आज के युवाओं के सामने अलग तरह की चुनौतियां हैं. उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर उनकी मेहनत प्रभावित होती है. इसके साथ ही उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई कई तरह के काम बदल सकता है और इससे युवाओं के रोजगार को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं. दिव्या मित्तल ने कहा कि वह दो बेटियों की मां हैं और इसी वजह से आने वाले समय को लेकर उनकी चिंता स्वाभाविक है. उनका सवाल है कि जिस भविष्य की ओर आज के बच्चे बढ़ रहे हैं, उस पर सार्वजनिक स्तर पर पर्याप्त चर्चा क्यों नहीं हो रही.

राजनीति बदलनी होगी: दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक राजनेता को बदलना नहीं है, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है. उन्होंने अपनी राजनीति के लिए चार शब्दों का इस्तेमाल किया इरादा, न्याय, फिक्र और सोच. उनका कहना था कि राजनीति ऐसी होनी चाहिए जिसमें लोगों की समस्याओं को सुना जाए और जनता को केवल चुनावी आंकड़े के रूप में न देखा जाए. उन्होंने साफ कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी. उनके अनुसार, जिन राजनीतिक व्यवस्थाओं से आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, उनके भीतर रहकर वही सवाल उठाना उनके लिए सही रास्ता नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नई राजनीति कैसे बनेगी और उसका ढांचा क्या होगा, यह लोगों के साथ मिलकर तय किया जाएगा.

इस्तीफे के बाद अफवाहों का भी किया जिक्र: दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर हुई चर्चाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के कुछ घंटों के भीतर एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता की ओर से उनके बारे में एक ऐसी मुलाकात का दावा किया गया, जो उनके अनुसार हुई ही नहीं थी. उन्होंने इसे राजनीति में महिलाओं को डराने की कोशिश के तौर पर देखा और कहा कि वह इससे डरने वाली नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग या व्यक्तिगत आरोपों के जरिए लोगों को सार्वजनिक जीवन से दूर रखने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.

पैसा और बाहुबल नहीं, लोगों की ताकत चाहिए: राजनीति में आने के लिए पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण जैसे सवालों पर भी दिव्या मित्तल ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उनके पास चुनावी राजनीति के लिए बड़ा आर्थिक संसाधन या बाहुबल नहीं है और वह जाति-धर्म के समीकरण के आधार पर राजनीति करने में विश्वास नहीं रखतीं. उन्होंने चुनावों में खर्च होने वाले पैसे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पैसा आखिरकार विकास से जुड़े संसाधनों से आता है. उनका कहना था कि उन्हें ऐसा पैसा नहीं चाहिए, बल्कि वह सड़क, पुल और स्कूल जैसी सुविधाओं पर खर्च देखना चाहती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासनिक सेवा में काम करते समय उन्होंने किसी व्यक्ति की जाति या धर्म पूछकर निर्णय नहीं लिया और राजनीति में भी वह इसी सिद्धांत पर आगे बढ़ना चाहेंगी.

15 सितंबर से IAS का सफर हुआ खत्म: 2013 बैच की यूपी कैडर की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. उन्होंने निजी कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला दिया था. केंद्र सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया. इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल ने कहा था कि IAS की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक चैप्टर है. उन्होंने परिवार, लेखन, शिक्षण और समाज सेवा से जुड़े अपने भविष्य के विकल्पों के संकेत भी दिए थे.

लंदन की नौकरी छोड़ बनी थीं IAS: दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की, लेकिन बाद में भारत लौटकर UPSC की तैयारी की और IAS बनीं. उनके प्रशासनिक करियर को करीब 13 साल का बताया गया है. मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए उन्हें एक गांव में पाइप से पानी पहुंचाने की पहल को लेकर भी चर्चा मिली थी. इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं.

इस्तीफे पर विपक्ष के नेताओं ने दी थी प्रतिक्रिया दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा था कि अगर दिव्या मित्तल चुनाव लड़ना चाहती हैं तो पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है.  समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उनके इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश में अधिकारियों पर कथित दबाव का मुद्दा उठाया था. यह उनका राजनीतिक आरोप था; दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के बारे में कहा था कि यह सोच-समझकर लिया गया फैसला है.  

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