आज चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के ‘अनिरुद्ध’ रूप की पूजा, रुके हुए सारे काम होंगे पूरे

आज आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी है, जिसे अनिरुद्ध चतुर्थी कहा जाता है. इस व्रत में भगवान गणेश के अनिरुद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है. अनिरुद्ध से मतलब है जिसे रोका न जा सके. सनातन धर्म में अनिरुद्ध चतुर्थी को बहुत अहम व्रत माना गया है. इस व्रत में भगवान गणेश के चमत्कारिक रूप ‘अनिरुद्ध’ की पूजा की जाती है. साथ ही यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के पुत्र ‘अनिरुद्ध’ के तत्वों से जुड़ा है. इस रूप से मतलब है जिसे रोका न जा सके.
इस दिन भद्रा काल भी रहेगा. इसके अलावा व्यातीपात योग भी बनेगा, जिसे ज्योतिष में अशुभ माना गया है. इन अशुभ योगों के बीच पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब-कब हैं और कब चंद्रोदय होगा इसकी जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है. वैसे आज के पंचांग के अनुसार चन्द्रोदय सुबह 08:44 बजे और चन्द्रास्त रात 09:39 बजे होगा।
यही वजह है कि आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी के दिन अनिरुद्ध रूप की पूजा करने से सारे रुके हुए काम बन जाते हैं. विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं. जीवन के अवरोध दूर होते हैं और खुशहाली आती है. धन-समृद्धि बढ़ती है. आज 17 जुलाई 2026 को अनिरुद्ध चतुर्थी है. जानिए इसकी पूजा विधि, मंत्र और व्रत के जरूरी नियम.
संतान सुख और खुशहाल दांपत्य जीवन: यदि अनिरुद्ध चतुर्थी परिवार सहित पूजा करें तो संतान सुख प्राप्त होता है. घर में शांति और खुशहाली रहती है. पति-पत्नी साथ में पूजा करें तो दांपत्य जीवन में मधुरता और प्रेम बढ़ता है. वहीं नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख मिलता है.
अनिरुद्ध चतुर्थी पर पूजा मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि 17 जुलाई 2026 को सुबह 06:27 मिनट से प्रारंभ होकर 18 जुलाई 2026 को सुबह 04:42 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर यह व्रत 17 जुलाई को रखना मान्य होगा.
आज न करें चंद्र दर्शन: धार्मिक मान्यता है कि विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से कलंक या दोष लगता है इसलिए हर हिंदू महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चंद्र दर्शन वर्जित है. लिहाजा आज सुबह 08:37 मिनट से रात 09:33 मिनट तक का समय चंद्रदर्शन न करें.
अनिरुद्ध चतुर्थी पूजा विधि: सुबह जल्दी स्नान करके लाल या पीले कपड़े पहनें. फिर भगवान गणेश के ‘अनिरुद्ध’ स्वरूप का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें. भगवान श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु या गणेश जी के अनिरुद्ध स्वरूप की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
फिर गणपति जी को लाल चंदन, सिंदूर, अक्षत, दूर्वा आदि अर्पित करके पूजा करें. विनायक चतुर्थी पर गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाना बहुत शुभ माना गया है. साथ ही इत्र अर्पित करें. घी का दीपक और धूप जलाएं. फिर गणपति बप्पा को मोदक, लड्डू, फल का भोग लगाएं.
‘ॐ गं गणपतये नमः‘ मंत्र का जाप करें. चतुर्थी की कथा पढ़ें या सुनें. आखिर में सपरिवार गणेश जी की कपूर से आरती उतारें और सभी को प्रसाद बांटें.
अनिरुद्ध चतुर्थी के लिए मंत्र: आज अनिरुद्ध चतुर्थी पर विशेष मंत्र- ‘ॐ अनिरुद्धाय हुं फट् नमः‘ का जाप करने से कामों में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है. इसके अलावा ‘वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ. निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥’ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का जाप कर सकते हैं.
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