पितृ पक्ष शुरू, आज पूर्णिमा श्राद्ध; मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें इस विधि से पूजा

✍️NNS Desk
पितृ पक्ष शुरू, आज पूर्णिमा श्राद्ध; मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए करें इस विधि से पूजा

आज भाद्रपद पूर्णिमा है और इसी के साथ पितृ पक्ष का आरंभ हो गये है. आज शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा. वहीं आज पंचक के साथ-साथ भद्रा का अशुभ साया भी रहेगा भाद्रपद पूर्णिमा को उन पूर्वजों की आत्‍मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ हो.

भाद्रपद पूर्णिमा तिथि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. इसी दिन से पितृ पक्ष शुरू होता है. इस तिथि पर मां लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से मां लक्ष्मी की उपासना जो भी भक्त भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन की समस्या खत्म होती है.

पितृ पक्ष को लेकर इस साल सबसे ज्यादा सवाल इसकी शुरुआत की तारीख को लेकर है. कुछ लोग 26 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू होने की बात कर रहे हैं, जबकि मुख्य श्राद्ध तिथियां 27 सितंबर से शुरू होंगी. इसका कारण 26 सितंबर को पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि है.

26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा. इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष की श्राद्ध तिथियों का क्रम शुरू होगा. पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा.

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर शुरू हो चुकी है. पूर्णिमा तिथि 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर स्नान-दान व पूजा करने के लिए कौन-कौन से शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं आइए इस बारे में जानें.

➤ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक.
➤अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक.
➤विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक.

क्यों है 26 सितंबर खास? 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा. जिन पूर्वजों का निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है.

इस वजह से 26 सितंबर को भी श्राद्ध पक्ष से जोड़कर देखा जा रहा है. लेकिन प्रतिपदा से शुरू होने वाले पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर को होगी.

27 सितंबर को पहला श्राद्ध: 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा. इसके बाद रोजाना अलग-अलग तिथियों के अनुसार श्राद्ध कर्म किए जाएंगे.

पितृ पक्ष में अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करना महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है.

कब कौन सा श्राद्ध?

26 सितंबर – पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर – प्रतिपदा
28 सितंबर – द्वितीया
29 सितंबर – तृतीया
30 सितंबर – चतुर्थी और पंचमी
1 अक्टूबर – षष्ठी
2 अक्टूबर – सप्तमी
3 अक्टूबर – अष्टमी
4 अक्टूबर – नवमी
5 अक्टूबर – दशमी
6 अक्टूबर – एकादशी
7 अक्टूबर – द्वादशी और मघा
8 अक्टूबर – त्रयोदशी
9 अक्टूबर – चतुर्दशी
10 अक्टूबर – सर्वपितृ अमावस्या

पितृ पक्ष में क्या करें?

पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है. परिवार अपनी परंपरा के अनुसार पिंडदान, भोजन और दान-पुण्य भी करते हैं.

अन्न, वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान करने की परंपरा भी कई परिवारों में है. इस दौरान पितरों का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है.

अगर मृत्यु तिथि पता न हो तो?

कई बार परिवार को पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि पता नहीं होती. ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है. 10 अक्टूबर को पड़ने वाली सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है.

पितृ पक्ष का समापन कब होगा?

पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. इस दिन पितृ पक्ष के अंतिम श्राद्ध कर्म किए जाएंगे. इसके बाद नवरात्रि की शुरुआत होगी.

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