औरैया में 7 बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया: छोटी बेटी ने दी मुखाग्नि, बोली- ‘हमें बेटों जैसे पाला’

✍️NNS Desk
औरैया में 7 बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा दिया: छोटी बेटी ने दी मुखाग्नि, बोली- ‘हमें बेटों जैसे पाला’

अमित शर्मा, औरैया।
UP में औरैया जनपद के दिबियापुर में सात बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा देकर निभाया बेटे का फर्ज. पति की मौत के बाद मां कृष्णा देवी ने अकेले सातों बेटियों की परवरिश की थी. शनिवार को मां के निधन के बाद सबसे छोटी बेटी सोनी सविता ने मुखाग्नि दी.

पिता के निधन के बाद मां ने अकेले पाला: दुर्गा नगर में रहने वाली कृष्ण देवी (59) के पति रामकिशोर सविता फौज में थे. रिटायर होने के कुछ साल बाद उनका निधन हो गया था. उस समय सामाजिक रीति-रिवाजों की वजह से रामकिशोर के अंतिम संस्कार में परिवार के भतीजे की मदद ली गई थी, क्योंकि उनके कोई बेटा नहीं था.

पति की मौत के बाद कृष्ण देवी ने अकेले ही अपनी 7 बेटियों की परवरिश की. बेटियों के लिए मां ही उनका सहारा और मार्गदर्शक थीं. कृष्णा देवी काफी समय से बीमार चल रही थीं. उनकी बेटियां मिलकर इलाज और घर का खर्च चला रही थीं. छोटी बेटी सोनी सविता (25) मायके में रहकर मां की देखभाल कर रही थी. उनके पति आगरा में प्राइवेट नौकरी करते हैं.

मां की अर्थी को सातों बेटियों ने दिया कंधा: शनिवार सुबह कृष्ण देवी का निधन हो गया. अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान मुखाग्नि देने पर चर्चा हुई. गांववालों और परिवार में किसी पुरुष रिश्तेदारों से यह जिम्मेदारी निभाने की बात चली.

इसी बीच कृष्ण देवी की सबसे छोटी बेटी सोनी सविता ने सबको टोक दिया. कहने लगीं- मां ने हमें बेटों की तरह पाला है. वह कहती थीं कि तुम सब बेटियां ही मेरे लिए बेटे हो. हमने भी कभी उन्हें बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी. अब हम मां के अंतिम संस्कार के लिए किसी और का सहारा नहीं लेंगे.

बेटी ने पूरे रीति-रिवाज के साथ मां को मुखाग्नि दी: सामाजिक रीति-रिवाजों को दरकिनार करते हुए कृष्ण देवी की 7 बेटियों ने मां की अर्थी को बारी-बारी से कंधा दिया. गांववालों और परिवार के लोगों ने भी उनकी मदद की. पार्थिव शरीर को लेकर सभी लोग दिबियापुर के मुक्तिधाम पहुंचे. वहां कृष्ण देवी की सबसे छोटी बेटी सोनी ने पूरे रीति-रिवाज के साथ मां को मुखाग्नि दी.

इस फैसले ने समाज में बेटियों की भूमिका को लेकर एक संदेश दिया. गांववालों के मुताबिक, मां ने जीवनभर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया. उनके लिए हर मुश्किल में खड़ी रहीं. बेटियों ने भी अंतिम समय में मां के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई.

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