कानपुर देहात में मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य निलंबित, मिली थीं टेबल पर नोटों की गड्डियां

कानपुर देहात के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है. सोशल मीडिया पर नोटों की गड्डियों के साथ वायरल फोटो और अनियमितताओं की खबरों का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. इससे पहले डॉ. हरप्रीत सिंह इन सभी आरोपों को साजिश बताते हुए खारिज कर चुके थे.
यह है पूरा मामला: कानपुर देहात का स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पिछले कई दिनों से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है. सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट और नोटों की गड्डियों के साथ वायरल तस्वीरों ने पूरे मामले को तूल दे दिया था. पोस्ट में कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार, नियमों के उल्लंघन और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे.
5 महीनों में बड़े पैमाने पर हुईं वित्तीय अनियमितताएं: वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि पिछले करीब पांच महीनों के दौरान दवा खरीद, टेंडर प्रक्रिया, नर्सिंग स्टाफ की भर्ती, मेंटेनेंस कार्य, लॉन्ड्री टेंडर और अन्य खरीद प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं. पोस्ट करने वाले ने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य होने का भी दावा किया था. मामले के तूल पकड़ने के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने वायरल फोटो और प्रकाशित खबरों का संज्ञान लिया. उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई.
कार्यवाहक प्राचार्य ने आरोपों को खारिज किया: ब्रजेश पाठक ने अपने बयान में कहा कि पारदर्शी व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली सरकार की प्रतिबद्धता है. सरकार की छवि धूमिल करने तथा भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को किसी भी स्थिति में क्षमा नहीं किया जाएगा. ऐसे मामलों में त्वरित और कठोरतम कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, निलंबन से पहले कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था. उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज में उन्होंने कई प्रभावशाली और कथित माफिया तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके चलते उन्हें बदनाम करने के लिए सुनियोजित साजिश रची जा रही है.
विभागीय जांच पर टिकीं निगाहें : उन्होंने यह भी कहा था कि वायरल पोस्ट में लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और उनके पास प्रत्येक आरोप का दस्तावेजी जवाब मौजूद है. साथ ही उन्होंने किसी भी निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही थी. अब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की कार्रवाई के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है. विभागीय जांच के नतीजों पर सभी की निगाहें टिकी हैं. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे मामले में आगे किन लोगों पर कार्रवाई होती है.
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