15 अगस्त को हरियाली तीज व्रत: इसे कुंवारी कन्‍या भी रख सकती, जानें पूजा की सही विधि

✍️NNS Desk
15 अगस्त को हरियाली तीज व्रत: इसे कुंवारी कन्‍या भी रख सकती, जानें पूजा की सही विधि

हरियाली तीज सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए मनाया जाता है. कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी. तब भगवान शिव ने सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है.

इस बार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त शनिवार को रखा जाएगा. 14 अगस्त को शाम 6:46 बजे से तृतीया तिथि प्रारंभ हो जायेगी जिसका समापन 15 अगस्त को शाम 5:28 बजे हो जायेगा अतः उदया तिथि के अनुसार हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त रखा जायेगा.

शिव-पार्वती की मूर्ति रखने के लिए कौन सी दिशा है शुभ? वास्तु शास्त्र में पूजा-पाठ, देवी-देवताओं के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान करना चाहिए. यह दिशा को देवताओं की मानी जाती है. ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को विराजमान करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इसलिए कहा जाता है कि मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति को विराजमान करने से पहले शुभ दिशा के बारे में जरूर जान लें.

अगर घर में उत्तर-पूर्व दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को रखना संभव नहीं है, तो ऐसे में उत्तर दिशा में मूर्ति को विरजमान करना शुभ माना जाता है. इस दिशा में मूर्ति को विराजमान करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है. हरियाली तीज के दिन पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख होना चाहिए.

किस दिशा में न रखें मूर्ति? वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को दक्षिण दिशा में भूलकर भी विराजमान नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिशा में पितरों का वास माना जाता है. इस दिशा में पूजा करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है.

कुंवारी कन्‍या भी रख सकती है यह व्रत: कुछ जगहों पर कुंवारी या अविवाहित कन्‍याएं भी हरियाली तीज व्रत का संकल्प करती हैं. इस व्रत को रखने के पीछे का आशय यह होता है कि जिस तरह से मां पार्वती ने इच्छित वर प्राप्ति की कामना के साथ व्रत रखकर कठिन तपस्‍या की थी और शिव जी को पति रूप में पाया था, वैसे ही अविवाहित लड़कियां भी हरियाली जीत पर कठिन व्रत रखकर शिव-पार्वती की उपासना कर सकती हैं. इस व्रत उपासना से इच्छित वर और अच्‍छे जीवनसाथी की मनोकामना पूर्ण होती है. धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मां पार्वती के कहने पर भगवान शिव ने सभी कुंवारी कन्‍याओं को आशीर्वाद दिया कि हरियाली तीज का व्रत रखने से इच्छित वर की प्राप्ति होगी. विवाह होने में आ रहीं बाधाओं का अंत होगा.

कुंवारी कन्‍या के लिए हरियाली तीज व्रत के नियम: कुंवारी कन्या अगर हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं तो इससे जुड़े नियमों का भी पालन जरूर करें. अविवाहित लड़कियों को इस पर्व पर सुबह जल्‍दी उठ जाना चाहिए और स्‍नान कर साफ या नया वस्त्र धारण करना चाहिए. इसके बाद देवी पार्वती और महादेव का ध्यान कर निर्जला व्रत का संकल्प करना चाहिए.

अगर निर्जला व्रत नहीं रख सकती हैं तो फलाहार व्रत का संकल्प करें. अब शिव जी और माता पार्वती की पूजा करें. पूजा में माता पार्वती को सिंदूर और सुहाग की सामग्री भी अर्पित करें. ध्यान रहे कि माता को सिंदूर अर्पित करते समय अपने ऊपर या अपनी मांग में गलती से भी सिंदूर न लगने दें. अब इच्छित वर प्राप्ति की मनोकामना को मन ही मन दोहराए. इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और शांत मन के साथ शिव चालीसा का पाठ करें. अब शाम के समय चंद्रोदय होने पर चंद्र देव को अर्घ्‍य दें. इसके बाद सात्विक भोजन करें.

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