YOGI GOVERNMENT: योगी सरकार का श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास पर फोकस

✍️By Nation Now Samachar Team
YOGI GOVERNMENT

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने सरकारी आवास पर श्रम एवं सेवायोजन विभाग (YOGI GOVERNMENT) के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रमिक और उद्योगपति एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि विरोधी, इसलिए नीतियों को इस भावना के साथ तैयार किया जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की औद्योगिक तरक्की प्रो-इंडस्ट्री और प्रो-श्रमिक दृष्टिकोण के संतुलन से ही सम्भव है. श्रम कानूनों को इस प्रकार सरल बनाया जाए जिससे उद्योगों को सुगमता हो, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि श्रमिकों का किसी भी प्रकार से शोषण न हो.

— Yogi Adityanath Office (@myogioffice) May 16, 2025

उद्योग विस्तार-रोजगार सृजन- YOGI GOVERNMENT

मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि “हर हाथ को काम देने के लिए हमें उद्योगों को सशक्त बनाना होगा.” औद्योगिक विस्तार ही अधिकाधिक रोजगार निर्माण का माध्यम है. उन्होंने कहा कि यदि उद्योग बंद होंगे तो कोई भी रोजगार सृजित नहीं हो सकेगा.

साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी जोर दिया कि दुर्घटनाओं की स्थिति में श्रमिकों और उनके परिवारों को सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय के साथ बीमा सुरक्षा दी जाए. राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे श्रमिक हितैषी और उद्योग समर्थ राज्य बने.

बाल श्रमिकों का पुनर्वासन और उज्जवल भविष्य

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाल श्रमिकों को आजीविका, शिक्षा और पुनर्वासन के लिए ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ और अन्य प्रायोजित योजनाओं से जोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि यह केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास है. उन्होंने अटल आवासीय विद्यालयों को देश में मॉडल के रूप में उभरने की बात कही और इनकी गुणवत्ता की मॉनीटरिंग सुनिश्चित करने को भी कहा.

श्रमिक अड्डों को बनाएं मॉडल हब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रमिक अड्डों को मॉडल के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया. इन स्थानों पर डोरमेट्री, शौचालय, पेयजल, कैंटीन और ट्रेनिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. कैंटीन में चाय-नाश्ता और भोजन 5-10 रुपये में मिलना सुनिश्चित किया जाए.

साथ ही उन्होंने कहा कि असंगठित श्रमिकों की स्किल मैपिंग कर न्यूनतम मानदेय की गारंटी दी जाए, ताकि यह कार्यबल संगठित श्रम शक्ति में परिवर्तित हो सके.

विदेश जाने वाले श्रमिकों के लिए विशेष योजना

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले निर्माण श्रमिकों को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ गंतव्य देश की भाषा का भी प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए. यह उनकी कार्यक्षमता के साथ सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी जरूरी है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर निजी अस्पतालों को कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESI) से जोड़ा जाए ताकि संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें.

उत्तर प्रदेश बना ‘अचीवर स्टेट’

बैठक में जानकारी दी गई कि आजादी के बाद से 2016 तक प्रदेश में 13,809 कारखाने पंजीकृत थे, जबकि पिछले 9 वर्षों में 13,644 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है. यह लगभग 99% की वृद्धि को दर्शाता है. भारत सरकार के BRAP (Business Reforms Action Plan) रिकमेंडेशन में श्रम विभाग को ‘अचीवर स्टेट’ का दर्जा मिला है, जिसकी सराहना मुख्यमंत्री ने की.

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