बिक गया पिज्जा इंडस्ट्री का बादशाह ‘Pizza Hut’, ऑनलाइन और होम डिलीवरी ने बदल दी तस्वीर

✍️NNS Desk
बिक गया पिज्जा इंडस्ट्री का बादशाह ‘Pizza Hut’, ऑनलाइन और होम डिलीवरी ने बदल दी तस्वीर

एक दौर था जब Pizza Hut सिर्फ एक पिज्जा कंपनी नहीं बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ बिताए गए खास पलों की पहचान माना जाता था. लाल छत वाले उसके रेस्टोरेंट, वीकेंड डिनर और डाइन-इन अनुभव ने उसे दुनिया के सबसे लोकप्रिय फूड ब्रांड्स में शामिल कर दिया था. लेकिन, समय के साथ ग्राहकों की पसंद बदली, कारोबार का तरीका बदला और अब Pizza Hut की कहानी एक नए मोड़ पर पहुंच गई है.

Yum Brands ने मंगलवार को घोषणा की कि वो Pizza Hut को प्राइवेट इक्विटी फर्म लॉन्ग रेंज कैपिटल को 2.7 अरब डॉलर में बेच रही है. यह सौदा सिर्फ मालिकाना हक बदलने तक सीमित नहीं है. बल्कि एक ऐसे ब्रांड के लिए नए अध्याय की शुरुआत है जिसने दशकों तक वैश्विक पिज्जा बाजार पर राज किया.

आखिर क्यों बेचनी पड़ी Pizza Hut? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस कंपनी का नाम कभी पिज्जा का पर्याय माना जाता था, उसे बेचने की जरूरत क्यों पड़ी. दरअसल, पिछले कई वर्षों से Pizza Hut लगातार प्रतिस्पर्धा और बदलते बाजार के दबाव से जूझ रही थी.कंपनी का बिजनेस मॉडल लंबे समय तक बड़े डाइन-इन रेस्टोरेंट्स पर आधारित रहा. लेकिन फूड इंडस्ट्री तेजी से ऑनलाइन और होम डिलीवरी की ओर बढ़ गई. ग्राहक मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए खाना मंगाने लगे. इस बदलाव के साथ तालमेल बैठाने में Pizza Hut अपेक्षाकृत धीमी साबित हुई.

Domino’s ने बदल दिया पूरा खेल: Pizza Hut के सामने सबसे बड़ी चुनौती Domino’s Pizza बनकर उभरी. Domino’s ने काफी पहले यह समझ लिया था कि भविष्य तेज डिलीवरी और डिजिटल ऑर्डरिंग का है. कंपनी ने तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश किया, ऑनलाइन ऑर्डरिंग को आसान बनाया और फास्ट डिलीवरी को अपनी पहचान बना लिया. इसका नतीजा यह हुआ कि ग्राहकों का बड़ा वर्ग Domino’s की ओर आकर्षित होने लगा. साल 2017 में Domino’s ने Pizza Hut को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन का दर्जा हासिल कर लिया. यह Pizza Hut के लिए एक बड़ा झटका था क्योंकि दशकों तक यह स्थान उसके पास रहा था.

डिलीवरी ऐप्स ने बढ़ाई मुश्किलें: बदलते बाजार में सिर्फ Domino’s ही चुनौती नहीं थी. डोर डैश और अन्य थर्ड-पार्टी डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने भी ग्राहकों के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया. अब ग्राहक किसी एक ब्रांड तक सीमित नहीं रहे। एक ही ऐप पर उन्हें कई विकल्प मिलने लगे. इससे Pizza Hut की पारंपरिक ग्राहक पकड़ कमजोर होती गई और बिक्री पर दबाव बढ़ने लगा.

नवंबर में ही मिल गए थे संकेत: Yum Brands ने पिछले वर्ष नवंबर में संकेत दिए थे कि वह Pizza Hut के लिए विभिन्न रणनीतिक विकल्पों पर विचार कर रही है. तभी से बाजार में चर्चा शुरू हो गई थी कि कंपनी निवेशक खोज सकती है या फिर ब्रांड को बेच सकती है.

एक छोटे से स्टोर से ग्लोबल ब्रैंड तक: Pizza Hut की शुरुआत 1958 में अमेरिका के कंसास राज्य के विचिटा शहर में हुई थी. भाइयों डैन कार्नी और फ्रैंक कार्नी ने एक छोटे से रेस्टोरेंट के रूप में इसकी नींव रखी थी. शुरुआत के कुछ ही समय बाद कंपनी ने फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया और तेजी से विस्तार शुरू कर दिया. देखते ही देखते यह स्थानीय कारोबार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बन गई.

शेयर बाजार में एंट्री और विस्तार: 1969 में Pizza Hut शेयर बाजार में लिस्ट हुई और महज दो साल बाद 1971 तक दुनिया की सबसे बड़ी पिज्जा चेन बन चुकी थी. उस दौर में Pizza Hut सिर्फ खाने की जगह नहीं थी, बल्कि परिवारों और दोस्तों के साथ समय बिताने का लोकप्रिय ठिकाना मानी जाती थी.

PepsiCo से Yum Brands तक का सफर: Pizza Hut की यात्रा में एक बड़ा मोड़ 1977 में आया, जब PepsiCo ने इसका अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद PepsiCo ने Taco Bell और KFC जैसे ब्रांड्स को भी अपने फूड बिजनेस का हिस्सा बनाया. बाद में 1997 में कंपनी ने अपने रेस्टोरेंट कारोबार को अलग कर नई इकाई बनाई, जिसका नाम Tricon ग्लोबल रेस्टोरेंट्स रखा गया. यही कंपनी आगे चलकर Yum Brands के नाम से जानी गई और Pizza Hut, KFC तथा Taco Bell लंबे समय तक एक ही समूह का हिस्सा बने रहे.

दशकों पुराना रिश्ता हुआ खत्म: इस बिक्री के साथ Pizza Hut का KFC और Taco Bell के साथ कई दशक पुराना कॉर्पोरेट संबंध समाप्त हो जाएगा. फास्ट फूड इंडस्ट्री के जानकार इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव मान रहे हैं क्योंकि Yum Brands के पोर्टफोलियो से अब एक प्रतिष्ठित वैश्विक ब्रांड अलग हो जाएगा.

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