UP पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा का रिजल्ट जारी, 76 हजार पास; सामान्य का कट-ऑफ OBC से 7 अंक ज्यादा

✍️NNS Desk
UP पुलिस कॉन्स्टेबल परीक्षा का रिजल्ट जारी, 76 हजार पास; सामान्य का कट-ऑफ OBC से 7 अंक ज्यादा

यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का रिजल्ट शुक्रवार को जारी कर दिया गया. 32,679 पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में 76,184 अभ्यर्थी पास हुए हैं. बोर्ड ने कैटेगरी वाइज कट-ऑफ भी जारी कर दी है.

जनरल वर्ग की कट-ऑफ 258.03 और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की 251.63 रही है. यानी जनरल की कट-ऑफ ओबीसी से 7 अंक ज्यादा रही है. हालांकि, ओबीसी की कट-ऑफ EWS से 4 अंक ज्यादा है. वहीं, अनुसूचित जाति (SC) की कट-ऑफ 239.34 और अनुसूचित जनजाति (ST) की 210.10 रही है.

उत्तर प्रदेश पुलिस रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन बोर्ड (UPPRPB) के मुताबिक, अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) होगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन 17 अगस्त से शुरू होगा. सितंबर में फिजिकल टेस्ट होगा। इसकी जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट (uppbpb.gov.in) पर जारी की जाएगी. डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल टेस्ट के बाद फाइनल रिजल्ट जारी किया जाएगा.

पुरुष अभ्यर्थियों को 25 मिनट में 4.8 किमी दौड़ पूरी करनी होगी: फिजिकल टेस्ट में पुरुष अभ्यर्थियों को 4.8 किलोमीटर की दौड़ 25 मिनट में पूरी करनी होगी. वहीं, महिला अभ्यर्थियों को 2.4 किलोमीटर की दौड़ 14 मिनट में पूरी करनी होगी.

28.86 लाख आवेदन आए थे, 6.94 लाख ने छोड़ी थी परीक्षा: बोर्ड के मुताबिक, कॉन्स्टेबल और समकक्ष पदों के 32,679 पदों के लिए 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. इनमें 19,62,560 पुरुष और 9,24,237 महिला अभ्यर्थी शामिल थीं। लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को प्रदेशभर के परीक्षा केंद्रों पर 6 पालियों में आयोजित की गई थी. इसके लिए प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1,183 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे.

भर्ती बोर्ड के अनुसार, तीन दिनों में कुल 21,92,236 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए. वहीं, करीब 6.94 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी. लिखित परीक्षा 300 अंकों की थी। इसमें 150 सवाल पूछे गए थे. हर सवाल 2 अंक का था. इस बार नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था खत्म कर दी गई थी.

परीक्षा के दौरान फर्जी अभ्यर्थियों और भ्रामक वीडियो फैलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई. 12 मुकदमे दर्ज किए गए और 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया. ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए फर्जीवाड़े के मामलों का पता लगाया गया.

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