सोमवती अमावस्या आज: इस विधि से करें भोलेनाथ की पूजा, जानें शुभ संयोग और मुहूर्त

✍️NNS Desk
सोमवती अमावस्या आज: इस विधि से करें भोलेनाथ की पूजा, जानें शुभ संयोग और मुहूर्त

सोमवार का दिन शिव जी को समर्पित है और जब इस दिन अमावस्या तिथि पड़ जाती है तो इस दिन और तिथि दोनों का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है. अधिकमास की अमावस्या तिथि आज सोमवार को मनायी जा रही है. सोमवार को अमावस्या पड़ने की वजह से इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है.

सोमवती अमावस्या महादेव और मां पार्वती की उपासना के लिए समर्पित होता है. यह तिथि पितरों के तर्पण के लिए भी अति शुभ मानी गयी है. आइए इस लेख में जानें कि साल के इस पहले सोमवती अमावस्या पर शुभ मुहूर्त क्या हैं, शिव जी की पूजा विधि क्या है और कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं.

पंचांग के अनुसार, 14 जून 2026 को अमावस्या तिथि की शुरुआत दोपहर 12:19 बजे पर हो चुकी है और तिथि का समापन 15 जून को सुबह 08:23 बजे होगा. इस तरह 15 जून को अमावस्या तिथि उदया तिथि के रूप में मान्य होगा.

शुभ मुहूर्त और काल

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:03 से सुबह 04:43 बजे तक.
प्रातः सन्ध्या- सुबह 04:23 से सुबह 05:23 बजे तक.
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:41 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक.
गोधूलि मुहूर्त- शाम 07:19 बजे से शाम 07:39 बजे तक.
सायाह्न सन्ध्या- शाम 07:20 बजे से रात 08:21 बजे तक.
अमृत काल- सुबह 11:28 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक.
निशिता मुहूर्त- बीच रात 12:02, जून 16 बजे से लेकर बीच रात 12:42, जून 16 तक

सोमवती अमावस्या पर खास योग

सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 05:23 बजे से लेकर शाम 07:08 बजे तक.
अमृत सिद्धि योग- सुबह 05:23 बजे से लेकर शाम 07:08 बजे तक.

मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय मंत्र का यथासंभव जाप करें. यह मन को एकाग्र करने और पितृ दोषों से मुक्ति दिलाने में सहायक है.

सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व: हिंदू पंचांग के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. जब चंद्रमा का प्रभाव कम होता है (अमावस्या), तब मन की शांति और चंचलता को वश में करने के लिए शिव साधना अत्यंत प्रभावी मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से वैवाहिक सुख में वृद्धि होती है, परिवार में खुशहाली आती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है.

सोमवती अमावस्या पर विशेष संयोग: वैसे तो सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का बड़ा महत्व है लेकिन इस साल अधिकमास की अमावस्या तिथि और अधिक महत्व वाली हो जाती है क्योंकि महादेव के निमित्त इस दिन अमावस्या तिथि पर मिथुन संक्राति भी हो रही है. सूर्य राशि परिवर्तन कर मिथुन राशि में इस दिन प्रवेश करेंगे. इस दिन अति शुभ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है. इन शुभ योगों में पूजा पाठ करने फल कई गुना बढ़ जाता है.

सोमवती अमावस्या पर पूजा विधि

➤सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में उठें और शिव जी का के ध्यान करें.
➤पानी में गंगाजल मिलाएं और स्नान कर तन-मन को पवित्र करें.
➤सूर्योदय होते ही सूर्य देव को जल अर्पित करें.
➤अब भगवान शिव और मां पार्वती की चौकी सजाएं.
➤दीपक जलाएं और मंत्रों का जाप करें.
➤अक्षत रोली लगाएं व दूध से बनी चीजों का भोग अर्पित करें.
➤भगवान से घर में सुख-शांति की प्रार्थना करें.
➤संभव हो तो सोमवती अमावस्या पर व्रत रखें.
➤दोपहर के समय पितरों के लिए पिंडदान करें.

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