अजा एकादशी 7 सितंबर को, अश्वमेध यज्ञ जितना मिलता है फल; जानें पारण का शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है. वैष्णव भक्तों के लिए एकादशी किसी उत्सव से कम नहीं होती. इस दिन व्रत का संकल्प करने से अश्वमेध यज्ञ करने जितना पुण्य फल प्राप्त होता हैं. धार्मिक मान्यताएं है कि इस व्रत को करने से अनजाने पापों से भी मुक्ति मिलती है. जीवन की सुख-समृद्धि, धन-संपदा में वृद्धि होती है.इस दिन भक्त व्रत और उपवास रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा करने से आयु, सुख, सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है. साथ ही व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने का मार्ग मिलता है. अगर आप भी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो एकादशी के दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत और पूजा कर सकते हैं. आइए जानते हैं अजा एकादशी का महत्व, तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों के बारे में-
शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा. एकादशी तिथि 6 सितंबर यानी आज शाम 7 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी.
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा.
अमृत काल: दोपहर 03:59 बजे से लेकर शाम 05:29 बजे तक रहेगा.
अजा एकादशी पर सुबह से ही पुनर्वसु नक्षत्र होगा और फिर शाम को पुष्य नक्षत्र शुरू हो जाएगा.
अजा एकादशी पर वरीयान योग बनेगा.
सर्वार्थसिद्धि योग शाम 06:14 बजे से लेकर 08 सितंबर की सुबह 06:15 बजे तक बना रहेगा.
अजा एकादशी का महत्व: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अपने पूर्व जन्मों और इस जन्म के सभी अनजाने में हुए पापों एवं दुखों से मुक्ति मिलती है. यह व्रत जीवन में खोई हुई सुख-समृद्धि, मान-सम्मान और धन-वैभव को वापस दिलाने में अत्यंत फलदायी माना गया है. मान्यता है कि पौराणिक काल में राजा हरिश्चंद्र ने भी अपना खोया हुआ राज्य और परिवार इसी अजा एकादशी का व्रत विधि-विधान से करके पुनः प्राप्त किया था.
पूजा विधि: अजा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और घर की साफ-सफाई करें. इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. स्नान के पानी में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है.
इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके एक चौकी स्थापित करें और उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें.
पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं. अंत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करें.
अजा एकादशी के दिन करें ये अचूक उपाय: तुलसी पूजन और जल अर्पित करना एकादशी के दिन तुलसी के पौधे के सामने शाम के समय घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें. (ध्यान रखें कि एकादशी के दिन तुलसी दल सुबह ही तोड़ लें और शाम को जल न चढ़ाएं).
पीली वस्तुओं का दान अजा एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीले वस्त्र, केले, चना दाल, केसर या पीली मिठाइयों का दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है.
मां लक्ष्मी को खीर का भोग शाम की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को मखाने या चावल की खीर में तुलसी दल डालकर भोग लगाएं. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और धन संबंधी रुकावटें समाप्त होती हैं.
विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ इस दिन अजा एकादशी की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें. साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है.
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