आषाढ़ मास आज से शुरू, पड़ेंगे देवशयनी एकादशी समेत 5 बड़े व्रत-त्योहार; जानें क्या करें

आज (30 जून) से आषाढ़ का महीना शुरू हो चुका है. हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ वर्ष का चौथा महीना होता है, जो चैत्र, वैशाख और ज्येष्ठ के बाद आता है. यह महीना मौसम के लिहाज से बेहद खास माना जाता है, क्योंकि यह गर्मी और वर्षा के बीच का संधि काल होता है. इसी समय से वर्षा ऋतु की शुरुआत भी मानी जाती है. आषाढ़ के महीने में वातावरण में नमी बढ़ने लगती है और मौसम धीरे-धीरे बदलता है. इसी वजह से इस दौरान संक्रमण, बुखार और अन्य बीमारियों का खतरा अधिक रहता है, क्योंकि शरीर को बदलते मौसम के अनुसार ढलने में समय लगता है.
धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ का महीना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा, साधना और उपासना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि इसे कामना पूर्ति का महीना भी कहा जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ माह 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई तक रहेगा. इस महीने का नाम आषाढ़ इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी पूर्णिमा तिथि पर पूर्वाषाढ़ा या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग होता है.
आषाढ़ महीने का महत्व:आषाढ़ महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व आते हैं, जो प्रकृति और जीवन से जुड़े होते हैं. महीने के पहले दिन खड़ाऊं (लकड़ी की चप्पल), छाता, नमक और आंवले का दान करना शुभ माना जाता है. यह दान किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को किया जा सकता है.
आषाढ़ मास के 5 बड़े व्रत-त्योहार
1-योगिनी एकादशी (10 जुलाई 2026): आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि यह व्रत रखने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
2-आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ (15 जुलाई 2026): आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होती हैं, जिसे आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहते हैं. इन 9 दिनों में 10 महाविद्याओं की पूजा-आराधना की जाती है. जप-तप, साधना के लिए गुप्त नवरात्रि पर्व विशेष माना गया है.
3-भड़ली नवमी (22 जुलाई 2026) : आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि को भड़ली नवमी, भड़ल्या नवमी या भड़रिया नवमी कहा जाता है. यह साल के 3 अबूझ मुहूर्त में से एक होता है. यानी कि इस दिन बिना मुहूर्त निकाले विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जनेऊ, नए काम की शुरुआत जैसे शुभ एवं मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. लेकिन इस साल भड़ली नवमी के समय गुरु तारा अस्त रहने से कोई शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे. आमतौर पर चातुर्मास प्रारंभ होने से पहले यह आखिरी शुभ मुहूर्त होता है.
4-देवशयनी एकादशी (25 जुलाई 2026) : आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी कहते हैं क्योंकि इसी दिन से भगवान विष्णु 4 महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है.
5-गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई 2026) : आषाढ़ महीने का आखिरी दिन यानी कि पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है. गुरुओं के प्रति आदर-सम्मान करने के इस पर्व का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है.
आषाढ़ का महीना साधना, उपासना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. यदि इस दौरान व्रत-पूजा और नियमों का पालन किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
16 जुलाई से पुरी रथ यात्रा
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि से ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से रथ यात्रा निकलती है. जिसमें लाखों श्रद्धालु महाप्रभु जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ खींचने और दर्शन करने के लिए आते हैं. इस साल यह रथ यात्रा 16 जुलाई को निकलेगी. इस दिन भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर जाते हैं और फिर 9 दिन वहीं विश्राम करते हैं.
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