Japan Punch Baby Monkey: Ichikawa City Zoo का नन्हा हीरो, Punch की भावुक कहानी

✍️Amisha Sachan
Japan Punch Baby Monkey: Ichikawa City Zoo का नन्हा हीरो, Punch की भावुक कहानी

जापान के Ichikawa City Zoo से सामने आई नन्हे जापानी मकाक Punch (पंची-कुन) की कहानी ने इंटरनेट पर लाखों दिलों को छू लिया। यह सिर्फ एक बंदर के बच्चे की कहानी नहीं, बल्कि लगाव, मातृत्व और भावनात्मक सहारे की अनोखी मिसाल है।

जन्म के साथ मिला अकेलापन

जुलाई 2025 में जन्मे पंच का वजन महज़ 500 ग्राम था। अनुभव की कमी के कारण उसकी मां ने उसे स्वीकार नहीं किया। विशेषज्ञों के अनुसार, जापानी मकाक जैसे सामाजिक प्राइमेट्स में मां का साथ केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और सामाजिक व्यवहार सीखने के लिए भी बेहद जरूरी होता है।मां से अलगाव के कारण पंच तनाव और असुरक्षा में चला गया था।

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) February 21, 2026

“ओरा-मामा”: एक बेजान खिलौना, लेकिन सच्चा सहारा

पंच के अकेलेपन को कम करने के लिए चिड़ियाघर के केयरटेकर्स ने उसे IKEA का एक ओरंगुटान सॉफ्ट टॉय दिया।पंच ने इस खिलौने को ऐसे गले लगाया जैसे उसे अपनी मां मिल गई हो।सोशल मीडिया पर लोगों ने इस खिलौने को प्यार से “ओरा-मामा” नाम दे दिया।वह सोते समय, खाते वक्त और डर लगने पर हर पल इसी खिलौने से चिपका रहता था। वायरल वीडियो में देखा गया कि जब बड़े बंदर उसे डराते, तो वह भागकर अपने खिलौने की “गोद” में छिप जाता था।

दुनिया का मिला साथ

पंच की कहानी वायरल होने के बाद IKEA Japan की अध्यक्ष स्वयं चिड़ियाघर पहुंचीं और पंच के लिए नए सॉफ्ट टॉय दान किए।यह दृश्य बताता है कि कभी-कभी एक छोटा-सा कदम भी किसी जीव के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

अब कैसी है पंच की हालत?

जनवरी 2026 से पंच को धीरे-धीरे दूसरे बंदरों के साथ सामाजिक रूप से घुलने-मिलने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।ताज़ा जानकारी के अनुसार पंच अब पहले से ज्यादा सक्रिय और आत्मविश्वासी है।उसे एक बड़े बंदर द्वारा उसके बाल संवारते (grooming) देखा गया — जो बंदरों की दुनिया में स्वीकार किए जाने का संकेत माना जाता है। अब वह कम समय खिलौने के साथ और ज्यादा समय अपने समूह के साथ बिताने लगा है।

एक खिलौने से असली परिवार तक

पंच की कहानी हमें सिखाती है कि भावनात्मक जुड़ाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। एक बेजान खिलौना भी कभी-कभी जीवनरेखा बन सकता है।आज पंच अपने “ओरा-मामा” के सहारे से निकलकर अपनी प्रजाति के असली परिवार का हिस्सा बन रहा है — और यही इस कहानी का सबसे सुंदर अध्याय है।

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