कानपुर पुलिस कमिश्नर इलाहाबाद हाईकोर्ट में तलब, तोड़फोड़ और कब्जे की कोशिश से नाराज

✍️NNS Desk
कानपुर पुलिस कमिश्नर इलाहाबाद हाईकोर्ट में तलब, तोड़फोड़ और कब्जे की कोशिश से नाराज

कानपुर नगर में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध तोड़फोड़ कर उसे ध्वस्त करने और कब्जे की कोशिश के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर पुलिस कमिश्नर को तलब किया है. कोर्ट ने कहा- 9 सितंबर को पुलिस कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने पेश हों. व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें घटना के दिन की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई की जानकारी हो.

कोर्ट ने इस मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया, केस डायरी और कोर्ट में दाखिल किए गए, जवाबी हलफनामे के बाद माना कि कानपुर नगर की पुलिस शिकायतकर्ता के पति की संपत्ति को गैर-कानूनी तरीके से गिराने और उस पर कब्जा करने में शामिल थी.

कोर्ट ने कहा- गंभीर मामला, दी जमानत: कोर्ट ने कहा यह बहुत ही गंभीर मामला है. पुलिस की ऐसी मनमानी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होती है न कि कानून को अपने हाथ में लेने के लिए.

कोर्ट ने आरोपी याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है. यह आदेश जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता योगेश कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.

क्या है पूरा मामला जानिए: याचिकाकर्ता योगेश कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले के विवेचक धर्मा कुशवाहा अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे. राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे के साथ घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज और विभिन्न वीडियो के रंगीन फोटो भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए. कोर्ट ने उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के अंशों तथा केस डायरी में दर्ज तथ्यों का परीक्षण किया.

फुटेज देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि कथित घटना दिनदहाड़े पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई. वीडियो फुटेज में अपर पुलिस उपायुक्त, कानपुर नगर कपिल देव मौके पर दिखाई दे रहे है. उनके पास आरोपी योगेश कुमार सिंह के खड़े होने की बात भी फुटेज से सामने आई. इसके अलावा एक अन्य आरोपी अरुण अवस्थी की मौजूदगी भी घटना स्थल पर दिखाई देने की बात अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज की गई.

जिला पुलिस कार्रवाई में शामिल लगती है: कोर्ट ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी करते हुए कहा- केस डायरी और दाखिल जवाबी हलफनामे में मौजूद सामग्री से ऐसा प्रतीत होता है कि जिला पुलिस उस संपत्ति को कथित रूप से ध्वस्त करने और उस पर कब्जा करने की कार्रवाई में शामिल थी जिसके संबंध में शिकायतकर्ता के पति की संपत्ति का उल्लेख किया गया था. कोर्ट ने पुलिस की इस कथित कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की और कहा कि यह एक बहुत गंभीर मामला है.

उत्तर प्रदेश से और खबरें