Lucknow Kanpur Travel: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर महंगा टोल, ट्रेन बनी सस्ती और तेज़ विकल्प!

Lucknow Kanpur Travel: लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे अब चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह इसकी सुविधा नहीं बल्कि इसका महंगा टोल है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा तय किया गया टोल आम यात्रियों की जेब पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह एक्सप्रेसवे वाकई लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा या फिर ट्रेनें बेहतर विकल्प रहेंगी।

कितना महंगा है एक्सप्रेसवे टोल?
एनएचएआई ने इस एक्सप्रेसवे पर एक ओर का न्यूनतम टोल 275 रुपये तय किया है। यदि कोई वाहन 24 घंटे के भीतर वापसी करता है तो उसे 415 रुपये देने होंगे। मासिक पास की कीमत 9220 रुपये रखी गई है। वहीं हल्के वाणिज्यिक वाहनों, बसों और ट्रकों के लिए यह शुल्क और भी अधिक है।जब इसमें ईंधन और अन्य खर्च जोड़ दिए जाएं, तो कुल यात्रा लागत काफी बढ़ जाती है। यही वजह है कि आम लोग इसे महंगा विकल्प मान रहे हैं।
समय की तुलना: सड़क बनाम ट्रेन
अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे से यात्रा 35 से 40 मिनट में पूरी हो जाएगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे सीधे कानपुर शहर तक नहीं जाता, बल्कि उन्नाव के शुक्लागंज तक ही सीमित है।इसका मतलब है कि वहां से कानपुर शहर तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय लगेगा, जिससे कुल यात्रा समय 1.5 से 2 घंटे तक पहुंच सकता है। इसके विपरीत, ट्रेनें पहले से ही 1:10 से 1:20 घंटे में यह दूरी तय कर रही हैं।
ट्रेनें क्यों हैं बेहतर विकल्प?
लखनऊ से कानपुर के बीच चलने वाली प्रीमियम ट्रेनें जैसे तेजस एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रियों के लिए ज्यादा सुविधाजनक और किफायती साबित हो रही हैं।
तेजस एक्सप्रेस: चेयरकार किराया ₹489, समय लगभग 1 घंटा 10 मिनट
- शताब्दी एक्सप्रेस: किराया ₹500, समय करीब 1 घंटा 18 मिनट
- वंदे भारत एक्सप्रेस: किराया ₹490, समय लगभग 1 घंटा
इसके अलावा, अन्य ट्रेनों में स्लीपर क्लास का किराया ₹150 तक है, जो एक्सप्रेसवे के मुकाबले बेहद सस्ता है।
एक्सप्रेसवे पर उठे सवाल
दैनिक रेलयात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल का कहना है कि इसे “लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे” कहना पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि यह कानपुर शहर तक नहीं पहुंचता। यह उन्नाव के शुक्लागंज तक ही सीमित है।शुक्लागंज से कानपुर जाने के लिए गंगा पुल और जाजमऊ के रास्ते गुजरना होगा, जहां पहले से ही ट्रैफिक की समस्या रहती है। ऐसे में जाम लगने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे यात्रा समय और बढ़ सकता है।
लागत और निर्माण
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण पर लगभग 3600 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसे दो चरणों में बनाया गया है—पहला स्कूटर इंडिया से बनी तक और दूसरा बनी से शुक्लागंज तक।इतनी बड़ी लागत के बावजूद यदि यह परियोजना यात्रियों को अपेक्षित सुविधा नहीं दे पाती, तो इसकी उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कब होगा उद्घाटन?
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 15 मई के बाद किसी भी दिन किया जा सकता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना है।
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