कम नहीं होगी आपकी EMI और महंगायी भी बढ़ेगी, रेपो रेट पुराने लेवल पर बरकरार

✍️NNS Desk
कम नहीं होगी आपकी EMI और महंगायी भी बढ़ेगी, रेपो रेट पुराने लेवल पर बरकरार

यद‍ि आप हर महीने होम लोन, कार लोन या अन्‍य क‍िसी प्रकार की ईएमआई (EMI) का भुगतान करते हैं तो यह खबर आपके काम की है. ग्‍लोबल लेवल पर म‍िड‍िल ईस्‍ट की टेंशन के बीच र‍िजर्व बैंक ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है. केंद्रीय बैंक ने लगातार पांचवी बार रेपो रेट को पुराने ही लेवल 5.25 प्रत‍िशत पर बरकरार रखा है. केंद्रीय बैंक के इस फैलसे से करोड़ों ग्राहकों को राहत म‍िलने की उम्‍मीद है.

र‍िजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने FY 2027 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा (MPC) के बाद अपने संबोधन में रेपो रेट को 5.25 प्रत‍िशत पर ही बरकरार रखने की बात कही.

आरबीआई गवर्नर के अनुसार, आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ सकती है, क्योंकि तेल और खाने-पीने की चीजों के दाम ऊपर जा रहे हैं. यह महंगाई तीसरी तिमाही (Q3) में अपने चरम पर पहुंचेगी, उसके बाद घटनी शुरू होगी। गवर्नर मल्होत्रा ने यह भी कहा कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने बताया कि डिमांड मजबूत होने की वजह से आर्थिक विकास को लगातार सपोर्ट मिल रहा है.

हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को पहले के अनुमानित 5.1% से घटाकर 5% कर दिया, जिसमें Q2 4.7%, Q3 5.9% और Q4 5.5% था। Q1FY28 के लिए मुद्रास्फीति 5.3% अनुमानित है, जिसमें जोखिम समान रूप से संतुलित हैं.

इससे पहले क्या थे अनुमान: बता दें खुदरा मुद्रास्फीति पिछले कुछ महीनों में मामूली रूप से बढ़ी है. केंद्रीय बैंक का चालू वित्त वर्ष के लिए औसत मुद्रास्फीति 5.1% रहने का अनुमान कायम है. जून की समीक्षा में भी रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखी गई थी, जबकि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी व बैंक दर 5.5% पर बनी हुई है. विशेषज्ञों को इस बार भी इन दरों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है, बल्कि नीति को निरंतरता मिलने की अधिक संभावना है.

वैश्विक संकट और गवर्नर की चेतावनी: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले ही संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष तथा प्रमुख व्यापार मार्गों और सप्लाई चेन में व्यवधान के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत अधिक अनिश्चितता की गिरफ्त में है. बाजार में उतार-चढ़ाव और कारोबारी माहौल में सतर्कता के कारण RBI को सतर्क रुख अपनाना पड़ रहा है, हालांकि, भारत की घरेलू विकास दर काफी मजबूत बनी हुई है. उनका मानना है कि इन बाहरी झटकों का मुकाबला करने के लिए लचीली नीति ही सही रास्ता है.

ब्रोकरेज फर्मों की क्या राय है? ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल के अनुसार, MPC इस बार भी दरों और रुख में कोई बदलाव नहीं करेगा, बल्कि ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाएगा. उन्होंने बताया कि RBI ने एफसीएनआर-प्रेरित तरलता को ऑफसेट करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन सरकारी कैश बैलेंस अधिक होने के कारण कोर लिक्विडेशन अभी भी लगभग 5.4 लाख करोड़ रुपये पर बनी है। यह दूसरी तिमाही में चरम पर पहुंच सकती है और बाद में सामान्य हो जाएगी.

बाजार की निगाहें कहाँ होंगी? एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज की सीनियर रिसर्च एनालिस्ट सीमा श्रीवास्तव का कहना है कि हालांकि कई वैश्विक केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के दबाव के चलते सतर्क हो गए हैं, लेकिन RBI घरेलू स्थितियों को प्राथमिकता देते हुए विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखेगा.

उनके अनुसार, बाजार को नीतिगत फैसले से अधिक गवर्नर के भाषण पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उसी से भविष्य की दिशा का पता चलेगा. अगर मुद्रास्फीति लगातार बढ़ती रही, तो वित्त वर्ष 2027 के अंत में दर बढ़ोतरी की आशंका बन सकती है, लेकिन अगर विकास स्थिर रहता है और मुद्रास्फीति नरम होती है, तो RBI अपनी पॉज को लंबा खींच सकता है.

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