घर का आंगन आखिर बना ‘मौत का कुआं ‘, 7 घंटे अथक प्रयासों के बाद भी नहीं बच पायी ‘यशी’

✍️NNS Desk
घर का आंगन आखिर बना ‘मौत का कुआं ‘, 7 घंटे अथक प्रयासों के बाद भी नहीं बच पायी ‘यशी’

कानपुर में घर का आंगन अचानक धंसने से 25 फीट गहरे गड्‌ढे में गिरी लड़की को 7 घंटे के ऑपरेशन के बाद बाहर निकाल लिया गया लेकिन अस्पताल में उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

हादसा शुक्रवार सुबह 6:40 बजे हुआ। रक्षाबंधन पर 18 साल की यशी सविता नहाकर बाथरूम से बाहर निकली थी. जैसे ही उसने अपना एक कदम आंगन की तरफ बढ़ाया, नीचे की जमीन धंस गई. यशी नीचे मौजूद बोरिंग में समा गई. उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला.

हादसे के वक्त घर में सिर्फ बड़ी बहन थी। मां-बाप घर से 200 मीटर दूर भैंस बांधने गए थे. बहन ने देखा तो उसने पहले रस्सी डालकर यशी को निकालने की कोशिश की. इतनी देर में मिट्‌टी और धंस गई और लड़की नीचे अंदर चली गई.

बहन चीखते हुए घर से बाहर भागी. मां-बाप और पड़ोसियों को बुलाया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई. 35 मिनट बाद पुलिस आई, लेकिन वह बेबस दिखी. घर से 22 किमी दूर जाजमऊ से फायरब्रिगेड को बुलाया गया. तब तक डेढ़ घंटे बीत चुके थे.

8 बजे फायरकर्मी मौके पर आए. उन्होंने उसी गड्‌ढे को फावड़े से खोदना शुरू किया, जिसमें यशी गिरी थी. मिट्‌टी धंसकर गड्‌ढे में गिर रही थी, इसलिए रेस्क्यू रोक दिया गया. फिर जेसीबी मंगवाई गई और बरामदे को तोड़ा गया. हादसा स्थल से 10 फीट दूर जेसीबी से गड्‌ढा खोदा गया. 10 बजे तक एनडीआरएफ और एसडीआरएफ दोनों रेस्क्यू में लग चुकी थी.

जेसीबी से करीब 20 फीट गड्‌ढा खोदा गया, लेकिन यशी की सटीक लोकेशन नहीं मिल रही थी. तब पोकलेन मंगाई गई. इससे 10 फीट और गहरा गड्‌ढा खोदा गया. दोपहर 2.20 बजे 30 फीट की खुदाई के बाद 60 जवानों की रेस्क्यू टीम लड़की तक पहुंच पाई. उसे जब बाहर निकाला गया. वह अचेत थी.

मामला जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव का है. यशी, पिता विनोद, मां रेखा, बड़ी बहन ऋचा और भाई अमित उर्फ भास्कर के साथ रहती थी. यशी सबसे छोटी थी। दो बहनों रूपा और अनुपमा की शादी हो चुकी है. भाई अमित लखनऊ में एक मेडिकल कंपनी में जॉब करता है. पिता बंटाई पर खेती करते हैं.

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