Supreme Court on SIR: SIR पर सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की दलील, बोलीं– बंगाल को चुनाव से पहले टारगेट किया

✍️By: Nation Now Samachar Desk
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Supreme Court on SIR: नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अदालत में दलीलें पेश कर रही हैं।सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल को चुनाव से ठीक पहले जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

ममता बोलीं– सिर्फ नाम काटे जा रहे हैं, इतनी जल्दी क्यों?

ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा,“बंगाल को चुनाव के पहले टारगेट किया गया है। सिर्फ तीन महीने में यह प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश हो रही है। SIR में सिर्फ नाम काटे जा रहे हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है और क्या इसका उद्देश्य निर्दोष नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर करना है।


CJI की टिप्पणी– कोई निर्दोष नागरिक बाहर न रहे

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि 19 जनवरी को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रक्रिया से जुड़ी कठिनाइयों को विस्तार से समझाया था।CJI ने कहा,“कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी निर्दोष नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। हर समस्या का समाधान संभव है ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।”

‘न्याय कई बार दरवाजे के पीछे रोता है’– ममता का भावुक बयान

ममता बनर्जी ने बेंच के प्रति सम्मान जताते हुए कहा,“मुझे इस बेंच के प्रति पूरा सम्मान है, लेकिन न्याय कई बार दरवाजे के पीछे रोता हुआ दिखाई देता है।”उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग को कई बार पत्र लिखा है।

CJI ने पूछा– राज्य के पास अच्छे वकील हैं, फिर आप क्यों?

CJI ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने भी अपने अधिकार से रिट पिटीशन फाइल की है और राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में शीर्ष वकील मौजूद हैं।उन्होंने कहा,“मिस्टर दीवान, मिस्टर सिब्बल जैसे बेहतरीन लोग कोर्ट की मदद के लिए हैं।”इस पर ममता बनर्जी ने जवाब दिया,“मैं खुद वहां के हालात के बारे में कोर्ट को बताऊंगी क्योंकि मैं उस राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हूं।”

आधार के साथ अतिरिक्त प्रमाण पत्र मांगे जाने पर आपत्ति

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मतदाताओं से आधार के साथ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में निवास या जाति प्रमाण पत्र तक मान्य नहीं किए जा रहे।उन्होंने इसे असमान और भेदभावपूर्ण प्रक्रिया बताया।

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