अमेठी में एग्रो डीलर्स का अल्टीमेटम: समस्याएं नहीं सुलझीं तो प्रभावित होगी कृषि सप्लाई चेन

अमेठी से नितेश तिवारी की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन (AIDA) की जिला इकाई ने खाद, बीज और कीटनाशक कारोबार से जुड़े व्यापारियों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की है। संगठन ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मुद्दों के समाधान की मांग की।

यह ज्ञापन जिलाध्यक्ष विजय कुमार शुक्ल के नेतृत्व में सौंपा गया, जिसमें खुदरा विक्रेताओं की आर्थिक और कार्य संबंधी परेशानियों को विस्तार से उठाया गया। एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में छोटे व्यापारियों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग उर्वरकों की डोर-स्टेप डिलीवरी सुनिश्चित करने की रही। संगठन का कहना है कि वर्तमान में खाद की ढुलाई का पूरा बोझ खुदरा दुकानदारों को उठाना पड़ता है, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है। छोटे दुकानदारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
इसके अलावा डीलर मार्जिन बढ़ाने की भी मांग की गई है। एसोसिएशन ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मार्जिन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि दूसरी ओर महंगाई, किराया, बिजली बिल और अन्य खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में व्यापारियों के लिए व्यवसाय चलाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।कीटनाशक दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। संगठन का कहना है कि यदि किसी उत्पाद का नमूना फेल होता है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल खुदरा विक्रेता पर डाल दी जाती है, जबकि उत्पाद सीलबंद स्थिति में कंपनियों से आता है। एसोसिएशन ने मांग की कि इस मामले में निर्माता कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि व्यापारियों के साथ न्याय हो सके।
इसके साथ ही ‘साथी पोर्टल’ की जटिलताओं को लेकर भी मुद्दा उठाया गया। छोटे बीज विक्रेताओं का कहना है कि इस पोर्टल की प्रक्रिया उनके लिए काफी कठिन है और इससे व्यापार में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था को केवल निर्माण कंपनियों तक सीमित किया जाए, ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके और व्यापार सुगमता बढ़े।ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे, जिनमें जिला महामंत्री राम किशोर त्रिवेदी, जिला उपाध्यक्ष राम किंकर त्रिपाठी, गौरव सिंह, सूबेदार सिंह और जिला कोषाध्यक्ष यतेंद्र प्रताप त्रिपाठी प्रमुख रूप से शामिल थे।
एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि समस्याएं लगातार बनी रहीं, तो इससे न केवल उनका व्यवसाय प्रभावित होगा बल्कि किसानों तक समय पर आवश्यक सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल हो जाएगा।इस पूरे मामले ने कृषि क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों की वास्तविक चुनौतियों को उजागर किया है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और व्यापारियों को कितनी राहत मिलती है।
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