आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी के पक्ष में आगे आयीं मायावती, बोलीं- ‘बुलडोजर नहीं चलना चाहिए’

✍️NNS Desk
आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी के पक्ष में आगे आयीं मायावती, बोलीं- ‘बुलडोजर नहीं चलना चाहिए’

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बड़ा बयान दिया है जिसमे रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की 38 शिक्षण इमारतों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाने के फैसले को पूरी तरह उचित बताया है और इसका स्वागत किया है. मायावती का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के पारिवारिक ट्रस्ट द्वारा स्थापित इस यूनिवर्सिटी को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं.

मायावती ने लिखा है कि, यूपी के जिला रामपुर में समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान के पारिवारिक ट्रस्ट द्वारा स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित यूनिवर्सिटी की 38 शिक्षण इमारतों को, उसका स्वीकृत नक्शा आदि के अभाव में, ध्वस्त करने की रामपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई पर अब रोक लगाने का फैसला उचित व इसका स्वागत. उनका मानना है कि इस तरह की विध्वंसकारी कार्रवाई पर रोक लगना एक राहत भरा कदम है.

बीएसपी प्रमुख की सलाह: अपनी पोस्ट में मायावती ने सिर्फ जौहर यूनिवर्सिटी तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है. उन्होंने सरकार को एक नई नीति अपनाने की सलाह दी है. मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, वैसे केवल जौहर विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में अगर अन्य और भी शिक्षण संस्थायें हैं जो अपने निर्माण आदि में सरकारी नियमों आदि का सही से अनुपालन नहीं कर पाये हैं, तो उन पर भी बुलडोजर चलाकर तोड़ने की सख्ती करने के बजाय, सरकार को उन सबको सही व नियमित कराने के सम्बंध में जरूरी कार्रवाई करने की नीति अपनानी चाहिये.

उन्होंने इसके पीछे मुख्य कारण छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना बताया है. मायावती के अनुसार, अगर शिक्षण संस्थानों पर इस प्रकार की सख्त बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी, तो उससे वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा.

छात्र-छात्राओं के भविष्य की सुरक्षा और सरकार से उम्मीद: मायावती ने जोर देकर कहा कि शिक्षण संस्थानों पर की जाने वाली किसी भी सख्त कार्रवाई से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे नियमों की कमी को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए ठीक कराया जा सके, न कि सीधे इमारतों को जमींदोज किया जाए.

अपनी बात को समाप्त करते हुए बीएसपी सुप्रीमो ने उम्मीद जताई है कि प्रदेश सरकार उनकी इस बात पर सकारात्मक रुख अपनाएगी. उन्होंने लिखा कि ताकि वहां शिक्षा हासिल करने वाले सभी छात्र-छात्राओं का जीवन किसी भी प्रकार से प्रभावित ना होने पाये. उम्मीद है कि सरकार बी.एस.पी. की इस जनहितैषी सलाह पर ज़रूर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी. इस प्रकार मायावती ने एक तरफ जहां जौहर यूनिवर्सिटी पर रोक के फैसले की सराहना की, वहीं दूसरी तरफ छात्रहित को ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों के लिए बुलडोजर संस्कृति से हटकर व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है

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