कानपुर-लखनऊ छह लेन एक्सप्रेस-वे तैयार: सफर होगा 35 मिनट में, सुरक्षा और सुविधा की पूरी गारंटी

कानपुर से प्रबुद्ध मिश्रा की रिपोर्ट कानपुर और लखनऊ के बीच यात्रा अब पहले से अधिक तेज़ और सुरक्षित होने जा रही है। लगभग 63 किलोमीटर लंबा छह लेन वाला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो गया है। एनएचएआई ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल महीने में इसका लोकार्पण होने के बाद यह आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

निर्माण और तकनीकी चुनौतियां
इस अत्याधुनिक मार्ग का निर्माण 5 जनवरी 2022 को शुरू हुआ था। हालांकि परियोजना अपने निर्धारित समय से लगभग आठ महीने की देरी के साथ पूरी हुई। परियोजना निदेशक नकुल प्रसाद वर्मा ने बताया कि देरी का मुख्य कारण बंथरा के पास स्थित डबल सर्किट पावर ग्रिड लाइन थी। हाईटेंशन विद्युत लाइन का विस्थापन तकनीकी चुनौतीपूर्ण था, जिसे अब सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है।पुराने हाईवे पर कानपुर-लखनऊ के बीच यात्रा करने में लगभग दो से ढाई घंटे लगते थे। नई एक्सप्रेस-वे पर वाहन की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा तय की गई है, जिससे यह दूरी अब महज 35 से 40 मिनट में पूरी की जा सकेगी।
सुरक्षा और यात्री सुविधा
3700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस मार्ग में यात्री सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी गई है। इस एक्सप्रेस-वे पर कुल 11 वाहन अंडरपास (VUP), 13 लाइट वाहन अंडरपास (LVUP) और 11 पैदल पारपथ बनाए गए हैं। 9.59 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर, एक रेलवे ओवरब्रिज और चार बड़े पुलों का निर्माण भी किया गया है, जिससे यात्रा पूरी तरह निर्बाध होगी।सुरक्षा के लिहाज से मार्ग पर 63 PTZ कैमरे, 21 इंटरचेंज कैमरे और 16 वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी 24×7 निगरानी के लिए दो अत्याधुनिक कंट्रोल रूम भी स्थापित किए गए हैं।
आर्थिक और औद्योगिक महत्व
एनएचएआई अधिकारियों का मानना है कि एक्सप्रेस-वे के खुलने से कानपुर और लखनऊ के बीच लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक गतिविधियों में गति आएगी। यह मार्ग न केवल यातायात सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक गलियारे के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।इस मार्ग के माध्यम से माल ढुलाई, परिवहन और उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला तेज़ और अधिक सुरक्षित हो जाएगी। साथ ही क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी नया आयाम मिलेगा।
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