Kanpur Dehat Nyay Ki Guhar: SP Office Gate Par Baitha Peedit Parivar

✍️Navneet Tiwari
Kanpur Dehat Nyay Ki Guhar

कानपुर देहात में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर उस समय भावुक और तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली जब एक पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर एसपी कार्यालय के मुख्य गेट पर ही बैठ गया। परिवार का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है और उन्हें अधिकारियों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा। रसूलाबाद क्षेत्र के मानवा गांव की रहने वाली महिमा तिवारी अपने परिवार के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं और न्याय की गुहार लगाई। इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों की पहुंच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसपी कार्यालय के बाहर धरने जैसी स्थिति

मंगलवार को कानपुर देहात पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर उस समय हंगामे जैसी स्थिति बन गई जब एक परिवार न्याय की मांग को लेकर कार्यालय के मुख्य द्वार पर बैठ गया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि वे कई बार अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के पास पहुंच चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। उनका कहना है कि उन्हें पुलिस अधीक्षक से मिलने का अवसर तक नहीं दिया गया।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार परिवार काफी देर तक कार्यालय के बाहर बैठा रहा और अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश करता रहा।

कौन हैं महिमा तिवारी और क्या हैं आरोप?

यह मामला रसूलाबाद क्षेत्र के मानवा गांव से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़िता महिमा तिवारी का आरोप है कि उनका परिवार लंबे समय से जमीन विवाद और उत्पीड़न से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है।

परिवार का दावा है कि:

  • उनकी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है।
  • शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई।
  • कई बार थाने और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े।
  • उन्हें न्याय दिलाने के बजाय टालमटोल की गई।
  • प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई नहीं हो रही।

महिमा तिवारी ने आरोप लगाया कि उनका परिवार लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहा है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

भाई की मौत के बाद न्याय की मांग

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके भाई की हत्या हुई थी और इस मामले में भी उन्हें न्याय नहीं मिल पाया।

परिवार के अनुसार वे पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार अधिकारियों के पास जा रहे हैं। उनका आरोप है कि मामले में कार्रवाई की मांग करने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

हालांकि मामले से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और जांच तथा प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

“20 से 25 बार आए, फिर भी नहीं हुई मुलाकात”

महिमा तिवारी ने दावा किया कि वह कई बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच चुकी हैं।

उनके अनुसार:

  • पिछले दो वर्षों से लगातार चक्कर लगाए जा रहे हैं।
  • 20 से 25 बार कार्यालय आने का दावा।
  • केवल एक बार अधिकारियों से मुलाकात हो सकी।
  • अधिकांश समय उन्हें वापस भेज दिया गया।
  • शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़िता का कहना है कि हर बार उन्हें किसी न किसी कारण से इंतजार कराया जाता है या दूसरे कार्यालयों में भेज दिया जाता है।

पुलिसकर्मियों पर भी लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित परिवार ने कार्यालय और थाने स्तर पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई।

परिवार का आरोप है कि:

  • अधिकारियों तक पहुंचने में बाधाएं खड़ी की जाती हैं।
  • शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
  • बार-बार अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता है।
  • न्याय की मांग करने पर अनदेखी की जाती है।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जमीन विवाद बना पूरे मामले की जड़

परिवार के मुताबिक पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है।

उनका कहना है कि:

मुख्य आरोप

  • जमीन पर कब्जे की शिकायत की गई।
  • विवाद को लेकर कई बार आवेदन दिए गए।
  • उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई गईं।
  • कार्रवाई की मांग लगातार की गई।

परिवार का आरोप है कि इतने लंबे समय के बाद भी विवाद का समाधान नहीं हो पाया है।

कार्यालय के बाहर छलका दर्द

एसपी कार्यालय के बाहर बैठा परिवार अपने साथ एक तस्वीर लेकर पहुंचा था। मौके पर भावुक दृश्य देखने को मिले।परिवार के सदस्य रोते हुए अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते दिखाई दिए। उनका कहना था कि यदि प्रशासन उनकी बात नहीं सुनेगा तो उन्हें न्याय कहां से मिलेगा।यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गया और कई लोगों ने परिवार की बात सुनने की मांग उठाई।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

इस घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं:

प्रमुख सवाल

  1. यदि कोई फरियादी अधिकारी से नहीं मिल पाता तो उसकी शिकायत कैसे सुनी जाएगी?
  2. क्या शिकायतों की समयबद्ध समीक्षा हो रही है?
  3. जमीन विवाद और गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई की गई?
  4. क्या पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुनवाई का अवसर मिला?
  5. प्रशासन ऐसे मामलों के समाधान के लिए क्या कदम उठा रहा है?

इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

निष्कर्ष

कानपुर देहात के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर न्याय की मांग को लेकर बैठा यह परिवार प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रसूलाबाद क्षेत्र की महिमा तिवारी और उनके परिवार का आरोप है कि दो वर्षों से अधिक समय से वे न्याय की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजर इस बात पर है कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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