इटावा जिला अस्पताल में लापरवाही: मरीज को 5 दिन तक परेशान, टांके के लिए निजी क्लिनिक बुलाने का मामला

रिपोर्टर जितेन्द्र सिंह इटावा में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। चौपला निवासी संजेश कुमार पिछले पांच से छह दिनों से अपनी पत्नी दीक्षा के इलाज के लिए जिला अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उचित इलाज नहीं मिला।

क्या हुआ मामला?
बताया जा रहा है कि दीक्षा के कान का कुंडल बच्चे द्वारा खींचे जाने से कान फट गया। ऐसे मामले में समय पर प्राथमिक उपचार और टांके लगाना अत्यंत आवश्यक होता है। लेकिन इटावा जिला अस्पताल में मरीज को लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा।अस्पताल में कमरा नंबर 121 में तैनात डॉक्टर राहुल आनंद पर आरोप है कि उन्होंने मरीज का उचित इलाज नहीं किया और उसे इधर-उधर घुमाते रहे। सबसे गंभीर आरोप यह है कि डॉक्टर ने मरीज को जिला अस्पताल में इलाज देने की बजाय अपने निजी क्लिनिक पर आने की सलाह दी।
लापरवाही के असर
इस तरह का व्यवहार न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और दूर-दराज से आए मरीजों के साथ अन्याय भी है। मरीज अक्सर 40-50 किलोमीटर दूर से उम्मीद के साथ जिला अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां उन्हें राहत की बजाय निरंतर परेशानी झेलनी पड़ती है।यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविकता को उजागर करता है, जिसमें कुछ डॉक्टर अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए निजी लाभ को प्राथमिकता देते हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला अस्पताल के सीएमएस परुतोष शुक्ला ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि डॉक्टर द्वारा मरीज को निजी क्लिनिक बुलाने जैसी बात सही पाई जाती है, तो संबंधित डॉक्टर को समझाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।अस्पताल प्रशासन ने यह भी कहा कि मरीजों की सुरक्षा और उचित इलाज सुनिश्चित करना प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी।
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