अमेठी और संग्रामपुर में विवादित राजनीतिक होर्डिंग, सियासी माहौल हुआ गर्म

✍️Amisha Sachan
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 अमेठी से सवांददाता नितेश तिवारी की रिपोर्ट अमेठी और संग्रामपुर में हाल ही में एक विवादित राजनीतिक होर्डिंग ने सियासी वातावरण को भड़काया है। अमेठी के रेलवे स्टेशन के बाहर और संग्रामपुर में अलग‑अलग स्थानों पर लगाए गए इन होर्डिंगों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तुलना पाकिस्तान के कुख्यात क्षेत्र ल्यारी के गैंगस्टर से की गई है। इस पैनलों पर लिखा गया संदेश, “आपको क्या चाहिए धुरंधर काम या अखिलेश का ल्यारी राज।” स्थानीय लोगों और राजनैतिक वर्गों के बीच यह तख्ती चर्चा का विषय बनी हुई है।

इन होर्डिंगों में पाकिस्तान के कराची के ल्यारी इलाके का उल्लेख है, जो अपने लंबे समय से चलने वाले गैंग युद्धों और हिंसात्मक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यही इलाका हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म “धुरंधर” में भी प्रस्तुत किया गया है, जिस कारण लोगों में पहले से ही यह नाम चर्चा में है। होर्डिंग के माध्यम से इस इलाके का उल्लेख अखिलेश यादव के शासन‑काल के दौरान उत्तर प्रदेश में हुई हिंसात्मक घटनाओं और दंगों से जोड़कर दिखाया गया है।

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) April 7, 2026

वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई को भी इन संदेशों में प्रमुखता से दर्शाया गया है। इन होर्डिंगों को “यूथ अगेंस्ट माफिया” नामक संगठन द्वारा लगवाया गया बताया जा रहा है, जिसमें संगठन के पदाधिकारी और उनके फोटो भी सम्मिलित हैं। संगठन का दावा है कि यह संदेश “सिविल सोसाइटी” और “युवा वर्ग” की आवाज़ को दर्शाता है, हालांकि राजनीतिक दलों ने इसे चुनावी माहौल को प्रभावित करने के तरीके के रूप में भी देखा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की प्रो-विवादित सामग्री सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को तेज करने का एक साधन बनती जा रही है। अमेठी, जो पहले से ही राजनीतिक रूप से सक्रिय और जागरूक क्षेत्र माना जाता रहा है, इस बार भी मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म और आम लोगों के बीच गर्म बहस का केंद्र बना हुआ है। राजनीतिक समर्थक, विरोधी और स्थानीय नागरिक इन होर्डिंगों पर अपनी‑अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।

जहाँ एक ओर कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कई नागरिक इसे सामाजिक सौहार्द और शांतिपूर्ण संवाद के लिए खतरनाक भी बता रहे हैं। फिलहाल, इस मामले पर किसी बड़े राजनेता या पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, पर स्थानीय स्तर पर चर्चाएँ और प्रतिक्रियाएँ जारी हैं।

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