आज रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण और पंचक! इन सबके बीच इन शुभ मुहूर्तों में बांधें राखी

✍️NNS Desk
आज रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण और पंचक! इन सबके बीच इन शुभ मुहूर्तों में बांधें राखी

रक्षाबंधन पर इस बार एक साथ इतने खगोलीय और ज्‍योतिषीय योग-संयोग बन रहे हैं कि राखी बांधने का शुभ समय जानना बेहद जरूरी है. दरअसल, आज 28 अगस्‍त 2026 को चंद्र ग्रहण है, साथ ही पंचक काल भी चल रहा है, वहीं सुबह-सुबह ही सावन पूर्णिमा तिथि भी समाप्‍त हो रही है. रक्षाबंधन का त्‍योहार सावन पूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है. इसके अलावा राहुकाल का भी ध्‍यान रखना होगा. ऐसे में इस साल बहनों को अपने भाई को राखी बांधने के लिए बहुत ज्‍यादा शुभ समय नहीं मिलेगा.  
 
द्रिक पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्‍त 2026 की सुबह 09:08 बजे से प्रारंभ होकर 28 अगस्‍त 2026 की सुबह 09:48 बजे तक है. इसलिए उदयातिथि के आधार पर स्‍नान-दान की पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व दोनों ही 28 अगस्‍त को मनाए जा रहे हैं. साथ ही राखी बांधने का पहला शुभ मुहूर्त 28 अगस्‍त की सुबह 09:48 पूर्णिमा तिथि समाप्‍त होने के साथ ही खत्‍म हो जाएगा.  

चंद्र ग्रहण और पंचक:वहीं साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्‍त की सुबह 06:53 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा. इस चंद्र ग्रहण का पीक समय सुबह 09:43 बजे है. हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आने से सूतक काल नहीं रहेगा. इससे राखी बांधने, पूजा-पाठ आदि में कोई बाधा नहीं आएगी.

वहीं पंचक 27 अगस्‍त की दोपहर 01:35 बजे से प्रारंभ होकर 1 सितंबर 2026 की तड़के सुबह 03:23 बजे तक रहेंगे. इसका भी रक्षाबंधन पर कोई असर नहीं होगा क्‍योंकि ज्‍योतिषाचार्यों के मुताबिक पंचक में राखी बांधने से दोष नहीं लगता है. इस समय में नए काम शुरू करने, घर बनाने, छत डलवाने, लकड़ी का सामान खरीदने, दक्षिण दिशा की यात्रा करने जैसे कामों पर ही रोक होती है.

रक्षाबंधन पर राहुकाल: हालांकि राहुकाल में राखी बांधना बेहद अशुभ होता है. आज 28 अगस्‍त को राखी के दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक है. इस समय में बहन भाई को राखी बांधने से बचें क्‍योंकि धार्मिक मान्‍यता है कि राहुकाल में राखी नहीं बांधना चाहिए. रावण की बहन सूर्पणखा ने उसे राहुकाल में राखी बांधी थी और फिर उसका विनाश हो गया था.

राखी बांधने के आज 3 शुभ मुहूर्त

राखी बांधने का सुबह का मुहूर्त – सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक (यह रक्षाबंधन मनाने का सर्वश्रेष्‍ठ मुहूर्त है)
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11: 56 बजे से 12:48 बजे तक (लेकिन इस बीच 12:22 बजे तक राहुकाल है लिहाजा इसके बाद 12:48 बजे तक केवल 26 मिनट में ही राखी बांधना शुभ रहेगा)
राखी बांधने का शाम का मुहूर्त – शाम 06:47 बजे से शाम 07:10 बजे तक और 07:44 बजे से रात 09:23 बजे तक

राखी बांधने की सही विधि: भाई-बहन सुबह स्‍नान करके साफ कपड़े पहनें. भगवान की पूजा करें, भोग लगाएं. फिर भाई को इस तरह बिठाएं कि उसका मुख पूर्व या उत्‍तर दिशा की ओर हो. राखी की थाली में रोली, कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई आदि रखें. बहन अपना सिर ढके और भाई का सिर भी रुमाल से ढके. उसके माथे पर तिलक लगाए. अक्षत लगाए. फिर भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधे. भाई इस दौरान अपने हाथ की मुट्ठी बंद रखें. राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारे, उसकी लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करे. उसको मिठाई खिलाए. भाई बहन को भेंट दे और पैर छुए.

हमारे सनातन धर्म में पीला रंग सबसे शुभ माना जाता है. इसलिए बहनें अपने भाई को पीले रंग की राखी बांध सकती हैं. इसके अलावा लाल रंग भी शुभ माना जाता है, इसलिए लाल रंग की राखी भी बांधी जा सकती है.

➤अगर किसी कारणवश पीले या लाल रंग की राखी उपलब्ध न हो, तो बहनें लाल रंग का रक्षा सूत्र यानी मौली भी इस्तेमाल कर सकती हैं. आजकल लाल और पीले रंग के मिश्रण वाली मौली भी मिलती है. ऐसे में बाजार से लाई गई राखी बांधने से पहले भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधना शुभ माना जाता है. इसके बाद राखी बांधी जा सकती है.

➤इसके साथ ही दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि भाई की आरती उतारते समय घी का दीपक जलाना चाहिए. इसमें शुद्ध घी का ही इस्तेमाल करें. जिस तरह का शुद्ध घी आप खाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसी तरह के घी का प्रयोग पूजा में भी करना चाहिए. बाजार में पूजा के नाम पर मिलने वाले नकली घी का इस्तेमाल करने से बचें.

➤तीसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. इसलिए भाई को इस तरह बिठाएं कि उसका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे. इस दिशा की ओर मुख करके राखी बांधना शुभ माना जाता है.

रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली का विशेष महत्व होता है. इसी थाली में तिलक, आरती और राखी बांधने के लिए आवश्यक पूजन सामग्री सजाई जाती है. भाई की आरती उतारने और उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा इस पर्व का अहम हिस्सा है. आइए जानते हैं कि रक्षाबंधन की पूजा थाली में किन-किन चीजों को शामिल करना चाहिए.

रक्षाबंधन की पूजन सामग्री: रक्षाबंधन की पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ थाली तैयार करें. इसमें राखी के साथ अन्य जरूरी पूजन सामग्री रखें. थाली में रोली, चंदन, अक्षत, दही, मिठाई, फल, सुपारी और नारियल शामिल कर सकते हैं. साथ ही घी का दीपक और अगरबत्ती भी रखें. राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई या चॉकलेट खिलाने की परंपरा है, जिसे प्रेम और खुशियों का प्रतीक माना जाता है.

राखी बांधते वक्त करें इस मंत्र का जाप: भाई को राखी बांधते वक्त बहन को इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए, “येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचल.” इस मंत्र के साथ राखी बांधने से यह भाई के लिए कवच की भांति काम करता है.

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