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Supreme Court on SIR: बंगाल में SIR के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई, खुद रखेंगी दलील

4 February 2026
Supreme Court on SIR: बंगाल में SIR के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुनवाई, खुद रखेंगी दलील

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले को लेकर ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और संभावना जताई जा रही है कि वह व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने अपनी दलीलें भी रख सकती हैं।मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अंतरिम आवेदन में कहा है कि वह इस मामले की याचिकाकर्ता हैं और राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया की जमीनी हकीकतों से पूरी तरह परिचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया और शिष्टाचार का ज्ञान है और वह सभी नियमों का पालन करेंगी।

TMC का पोस्ट: “People’s Advocate” के रूप में पेश हुईं ममता

तृणमूल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक पोस्ट साझा किया है, जिसमें ममता बनर्जी फाइलों के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। पोस्ट में उन्हें “People’s Advocate” (जनता का वकील) कहा गया है, जबकि विपक्षी रुख को “Devil’s Advocate” बताया गया।कैप्शन में लिखा गया कि ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में SIR के खिलाफ कानूनी चुनौती को स्वीकार करती हैं और इस मुद्दे पर मजबूती से लड़ाई लड़ेंगी।

CJI सूर्यकांत की पीठ करेगी सुनवाई

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ करेगी, जिसमें शामिल हैं:

  • प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
  • न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची
  • न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली

पीठ के समक्ष मोस्तरी बानू के साथ-साथ टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन द्वारा दाखिल तीन याचिकाओं पर सुनवाई होगी।


SIR प्रक्रिया को लेकर कोर्ट पहले भी दे चुका निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को निर्देश जारी करते हुए कहा था कि बंगाल में SIR प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और इससे किसी भी नागरिक को असुविधा नहीं होनी चाहिए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर ममता के गंभीर आरोप

सुनवाई से पहले ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग की है। उन्होंने अन्य विपक्षी दलों से समर्थन भी मांगा।ममता का आरोप है कि निर्वाचन आयुक्त ने बैठक के दौरान अहंकार दिखाया और उनका अपमान किया। यही कारण है कि वह प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक बीच में छोड़कर बाहर निकल आई थीं।