कानपुर गंगा में 350 किलो की डॉल्फिन की मौत:लोग बोले- प्रदूषण से जान गई

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी के किनारे उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 350 किलो वजनी डॉल्फिन का शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। यह दृश्य देखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए। लोगों ने डॉल्फिन के शव को रस्सियों से बांधकर करीब 10 लोगों की मदद से किनारे तक खींचा, जिसके बाद वन विभाग और प्रशासन को सूचना दी गई।

गंगा में डॉल्फिन की मौत से मचा हड़कंप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉल्फिन काफी समय से मृत प्रतीत हो रही थी और उसके शरीर से दुर्गंध आ रही थी। गंगा में डॉल्फिन का यूं मृत पाया जाना न सिर्फ दुर्लभ है, बल्कि यह नदी की सेहत और जलीय जीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। मौके पर मौजूद लोगों ने आशंका जताई कि गंगा में बढ़ते प्रदूषण के कारण ही डॉल्फिन की मौत हुई होगी।
10 लोगों ने मिलकर खींचा शव
डॉल्फिन का वजन अत्यधिक होने के कारण उसे बाहर निकालना आसान नहीं था। स्थानीय लोगों ने रस्सी का इंतजाम किया और करीब 10 लोगों ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद शव को किनारे लाया। इस दौरान आसपास लोगों की भीड़ लग गई और घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।
प्रदूषण पर उठे गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानपुर क्षेत्र में गंगा नदी लंबे समय से औद्योगिक और घरेलू कचरे से प्रदूषित है। चमड़ा उद्योगों, नालों और रासायनिक अपशिष्ट के कारण पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो ऐसी घटना टाली जा सकती थी।एक स्थानीय निवासी ने कहा,“जब इंसानों के लिए गंगा का पानी सुरक्षित नहीं है, तो डॉल्फिन जैसे संवेदनशील जीव कैसे जिंदा रहेंगे?”
वन विभाग और प्रशासन की जांच
सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और डॉल्फिन के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। प्रारंभिक जांच में उम्रदराज या बीमारी की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है, लेकिन प्रदूषण की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डॉल्फिन: गंगा की पहचान और जैव विविधता
गौरतलब है कि गंगा डॉल्फिन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal) है। यह जीव साफ और ऑक्सीजन युक्त पानी में ही जीवित रह सकती है। डॉल्फिन की मौजूदगी को नदी के स्वास्थ्य का संकेत माना जाता है। ऐसे में उसकी मौत यह दर्शाती है कि गंगा का इकोसिस्टम खतरे में है।
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