UP News : लखनऊ। राजधानी लखनऊ में हुए एक दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जी-20 शिखर सम्मेलन से जुड़ी एक रोचक और चौंकाने वाली घटना साझा की। उन्होंने बताया कि आयोजन के दौरान शहर को सजाने के लिए लगाए गए गमलों में से कुछ गमले एक व्यक्ति मर्सिडीज कार में आकर उठा ले गया। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड भी हुई।

सीएम योगी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में मौजूद मूल्यों और नैतिकता की कमी की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय अतिथि भारत की मेहमाननवाज़ी और स्वच्छता की सराहना कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझकर उठा ले जा रहे थे। मुख्यमंत्री ने इसे सामाजिक चेतना की कमी और “व्यक्ति–प्रधान मानसिकता” का उदाहरण बताया।
अखिलेश यादव का पलटवार: “मर्सिडीज़ वालों से बुलडोज़र डरता है क्या?”
सीएम योगी के इस बयान के बाद सियासी माहौल भी गर्म हो गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए तंज कसा“मर्सिडीज़ वालों से बुलडोज़र डरता है क्या, या अमीरों को विशेष छूट?”अखिलेश का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से सरकार पर हमला था, जिसमें उन्होंने कानून के समान अनुपालन पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर गमला चोरी जैसी घटना किसी गरीब या आम नागरिक ने की होती, तो कार्रवाई होती, लेकिन मर्सिडीज कार से जुड़ी घटना पर सरकार की तरफ से कोई बुलडोज़र कार्रवाई नहीं हुई।
राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा
सीएम योगी की टिप्पणी मूल रूप से सामाजिक मूल्यों पर सवाल उठाने के लिए थी, लेकिन अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया। इससे यूपी की राजनीति में एक बार फिर “बुलडोज़र मॉडल”, “अमीर–गरीब के लिए अलग कानून” और “कानून-व्यवस्था” जैसे मुद्दे फिर से सुर्खियों में आ गए।विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी मौसम में ऐसी बयानबाज़ी सिर्फ विवाद नहीं बढ़ाती, बल्कि राजनीतिक मैदान में नए नैरेटिव भी गढ़ती है।
