हमीरपुर में 50 साल बाद निकली बैलगाड़ियों की बारात, परंपरा हुई पुनर्जीवित

✍️Amisha Sachan
Bullock cart procession takes place in Hamirpur after 50 years, tradition revived

रिपोर्ट: प्रवीण कुमार मिश्रा, हमीरपुर हमीरपुर जिले के थाना मौदहा क्षेत्र के अंतिम गांव गुड़ा में सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को फिर से जीवंत करते हुए 25 बैलगाड़ियों में भव्य बारात निकाली गई। करीब 50 वर्षों से बंद पड़ी बैलगाड़ी बारात की इस परंपरा को दोबारा शुरू करने का सपना दोनों परिवारों ने मिलकर साकार किया।

गांव गुड़ा निवासी जागेंद्र द्विवेदी के पुत्र मोहित द्विवेदी, जो मोबाइल की दुकान चलाते हैं, का विवाह भेड़ी जलालपुर निवासी मोहिनी पाठक, पुत्री विवेक पाठक, के साथ 25 फरवरी को तय हुआ था। परिवार की इच्छा थी कि बारात पारंपरिक अंदाज में बैलगाड़ियों से निकाली जाए। इसके लिए 25 सजी-धजी बैलगाड़ियां बुक की गईं।

बुधवार दोपहर देसी ठाठ-बाट के साथ लगभग 200 लोगों की मौजूदगी में बारात रवाना हुई। दूल्हा बैलगाड़ी पर सवार होकर खेतों के रास्ते करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए द्विवेदी परिवार के फार्म हाउस पहुंचा। बैलगाड़ियों में सवार बारात को देखकर ग्रामीण और राहगीर आश्चर्यचकित रह गए।

पारंपरिक रंग में रंगा विवाह समारोह

विवाह समारोह पूरी तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। कार्यक्रम में कठघोड़वा नृत्य और लौंडा नाच का आयोजन किया गया। तमूरा भजन, महिलाओं द्वारा गाए गए बुंदेलखंडी लोकगीत और पत्तल में परोसा गया देशी भोजन मुख्य आकर्षण रहे। मेन्यू में कद्दू, आलू-बैंगन की सब्जी सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल थे, जिन्हें मेहमानों को बैठाकर सम्मानपूर्वक परोसा गया।

तीन दिन चला उत्सव

विवाह की रस्में तीन दिनों तक चलीं—पहले दिन तिलक, दूसरे दिन द्वारचार और तीसरे दिन विदाई। विशेष बात यह रही कि 26 फरवरी को दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से ही की गई, जो उपस्थित लोगों के लिए एक यादगार पल बन गया।यह अनोखी बारात न केवल ग्रामीण संस्कृति की झलक दिखाती है, बल्कि आधुनिक दौर में पारंपरिक मूल्यों और सादगी को फिर से अपनाने की प्रेरणा भी देती है।

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