अमेठी में अष्टमी पर उमड़ी आस्था की लहर, “जय माता दी” के जयकारों से गूंजे मंदिर

✍️Amisha Sachan
अमेठी में अष्टमी पर उमड़ी आस्था की लहर, “जय माता दी” के जयकारों से गूंजे मंदिर

अमेठी उत्तर प्रदेश के अमेठी में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह होते ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गईं और पूरा वातावरण “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। इस दिन को शक्ति उपासना का विशेष पर्व माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचे।

अष्टमी पर उमड़ी आस्था की भीड़

नवरात्रि के आठवें दिन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे मां के दर्शन के लिए पहुंचे। कई स्थानों पर सुबह से ही पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो गया, जो पूरे दिन चलता रहा। भक्तों ने मां से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) March 26, 2026

कन्या पूजन और भव्य आयोजन

अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। अमेठी के विभिन्न मोहल्लों और मंदिरों में कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन किया गया। छोटी-छोटी बालिकाओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की गई और उन्हें भोजन, वस्त्र व उपहार दिए गए। यह परंपरा समाज में नारी सम्मान और शक्ति की उपासना का प्रतीक मानी जाती है।

“जय माता दी” से गूंजा वातावरण

मंदिर परिसरों में भक्ति का माहौल चरम पर रहा। ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालु “जय माता दी” के जयकारे लगाते नजर आए। कई जगहों पर सामूहिक आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। यह दृश्य न केवल आध्यात्मिक था, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना।

अष्टमी और नवमी को लेकर असमंजस

इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक साथ पड़ने के कारण कुछ श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति भी देखने को मिली। कई लोगों ने अष्टमी पर ही कन्या पूजन किया, जबकि कुछ ने नवमी के दिन पूजा करने का निर्णय लिया। हालांकि, धार्मिक जानकारों के अनुसार दोनों ही दिन पूजा का विशेष महत्व होता है।

हवन और कलश पूजन की तैयारी

जिन श्रद्धालुओं ने नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की थी, वे अष्टमी और नवमी के अवसर पर हवन की तैयारी में जुटे नजर आए। घरों और मंदिरों में विधि-विधान से हवन किया जाएगा, जिससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह परंपरा नवरात्रि के समापन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

प्रशासन भी रहा सतर्क

श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी सक्रिय रही। मंदिरों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने के प्रयास किए गए।

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