UP Police SI Exam Controversy : UP Police SI परीक्षा के सवाल पर बवाल: ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल से छिड़ी सियासी बहस

✍️Amisha Sachan
UP Police SI परीक्षा के सवाल पर बवाल: ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल से छिड़ी सियासी बहस

UP Police SI Exam Controversy : उत्तर प्रदेश पुलिस की सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा का एक सवाल इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।अभिजात मिश्रा का कहना है कि ‘पंडित’ शब्द भारतीय परंपरा में विद्वत्ता, ज्ञान और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि परीक्षा के विकल्पों में इसे अवसरवाद या नकारात्मक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, तो यह न केवल अनुचित है बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसा भी है। उन्होंने इस विषय को गंभीर बताते हुए परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

सवाल क्या था और विवाद क्यों हुआ?

जानकारी के अनुसार, यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में कई विकल्प दिए गए थे, जिनमें ‘पंडित’ शब्द को ऐसे संदर्भ में रखा गया था जिसे कई लोगों ने आपत्तिजनक माना। जैसे ही यह प्रश्न सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे भाषा और संस्कृति के प्रति असंवेदनशीलता बताया, जबकि कुछ ने इसे सामान्य परीक्षा प्रश्न का हिस्सा माना।हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक परीक्षा प्राधिकरण की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है।

अभिजात मिश्रा ने उठाई कार्रवाई की मांग

भाजपा नेता अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में कहा कि परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय में शब्दों का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस प्रश्नपत्र को तैयार करने वाले जिम्मेदार लोगों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस पत्र की कॉपी साझा की है, जिसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया। उनके समर्थकों का कहना है कि शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं में ऐसे शब्दों के प्रयोग से समाज में अनावश्यक विवाद पैदा हो सकते हैं।

भाषा और संवेदनशीलता का सवाल

दरअसल, प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न तैयार करते समय भाषा और शब्दों के चयन का विशेष महत्व होता है। भारत जैसे विविधता वाले देश में कई शब्दों का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व जुड़ा होता है। ऐसे में यदि किसी शब्द का प्रयोग गलत संदर्भ में हो जाए, तो विवाद की संभावना बढ़ जाती है।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्र बनाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर समीक्षा होनी चाहिए। इससे न केवल त्रुटियों से बचा जा सकता है बल्कि समाज की भावनाओं का भी सम्मान बना रहता है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

इस मामले पर सोशल मीडिया पर भी लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ लोग इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शब्दों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर होना चाहिए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि किसी शब्द के प्रयोग को लेकर इतनी बड़ी बहस करना उचित नहीं है।फिर भी यह विवाद एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि परीक्षा प्रणाली में भाषा की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

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