यूपी की 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 10 अप्रैल के बाद, BJP और सपा की रणनीतियां तेज

✍️Amisha Sachan
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उत्तर प्रदेश में घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। चुनाव आयोग ने अभी तक तारीखों का ऐलान नहीं किया है। अधिकारियों के मुताबिक, SIR के बीच उपचुनाव नहीं कराए जा सकते, इसलिए फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद ही इन सीटों पर चुनाव संभव हैं।तीनों सीटों पर सियासी रणनीति पहले ही शुरू हो चुकी है। फरीदपुर सीट पर भाजपा अपने वर्तमान विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल के बेटे को टिकट देने पर विचार कर रही है। वहीं, सपा घोसी और दुद्धी में पूर्व विधायकों के परिवार के सदस्यों को उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी मान रहे हैं।

घोसी सीट: सुधाकर सिंह के निधन के बाद

मऊ जिले की घोसी सीट सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद खाली हुई। उन्होंने पिछली बार सपा के दारा सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद उपचुनाव में भारी अंतर से जीत हासिल की थी। अब सपा ने सहानुभूति कार्ड खेलते हुए सुधाकर सिंह के छोटे बेटे सुजीत सिंह को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने इस सीट से उम्मीदवार अभी घोषित नहीं किया है।

दुद्धी सीट: विजय सिंह गोंड का निधन

सोनभद्र जिले की आरक्षित दुद्धी सीट भी उपचुनाव के लिए तैयार है। पिछली बार भाजपा विधायक रामदुलार गोंड के रेप केस में सजा मिलने के बाद यह सीट खाली हुई थी। 2024 में सपा के विजय सिंह गोंड ने भाजपा उम्मीदवार श्रवण गोंड को हराया था। अब विजय सिंह गोंड के 8 जनवरी 2026 को निधन के बाद, सपा ने परिवार के सदस्य को उम्मीदवार बनाने का संकेत दिया है। भाजपा इस सीट पर श्रवण कुमार को फिर से उतारने की तैयारी में है।

फरीदपुर सीट: डॉ. श्याम बिहारी के निधन के बाद

बरेली जिले की फरीदपुर सीट पर भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का 2 जनवरी, 2026 को कार्डिएक अरेस्ट से निधन हो गया। भाजपा सहानुभूति का फायदा उठाने के लिए उनके 26 वर्षीय बेटे ईशान या पत्नी को टिकट दे सकती है। वहीं, एबीवीपी अध्यक्ष जवाहर लाल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह भी दावेदारी कर रहे हैं। सपा की ओर से पूर्व विधायक विजय पाल सिंह को मैदान में उतारने की संभावना है।

भाजपा: बंगाल चुनाव में व्यस्त

भाजपा के वरिष्ठ नेता पश्चिम बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। CM योगी आदित्यनाथ, डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक प्रचार में शामिल हैं। निचले स्तर के कैडर क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं और संभावित उम्मीदवारों को स्थानीय स्तर पर सक्रिय होने के संकेत दिए गए हैं।

सपा: जल्दी उपचुनाव चाहती

सपा नेता तीनों सीटों पर उपचुनाव जल्द करवाने के पक्ष में हैं। पार्टी इसे अगले विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बनाने और जनाधार को समझने का अवसर मान रही है। सपा को उम्मीद है कि सवर्ण वोटर में भाजपा के प्रति नाराजगी को भुनाया जा सकता है।

बसपा: फिलहाल सक्रिय नहीं

उपचुनाव में फिलहाल बसपा का कोई सक्रिय उम्मीदवार नजर नहीं आ रहा है। माना जा रहा है कि अगर बसपा मैदान में उतरती है, तो यह सीधे सपा को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि भाजपा के लिए मुकाबला अपेक्षाकृत आसान होगा।कुल मिलाकर, यूपी की ये तीन उपचुनाव सीटें न केवल स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। भाजपा और सपा दोनों ही अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हैं और उम्मीदवारों की घोषणा फाइनल लिस्ट के साथ ही होने की संभावना है।

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