सुल्तानपुर: प्रवेश परीक्षा बना महाकुंभ, सरस्वती विद्या मंदिर में उमड़ा छात्रों का जनसैलाब

सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर विवेकानन्द नगर एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया, जब सत्र 2026-27 के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा में छात्रों और अभिभावकों का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा।कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश पाने की होड़ ने इस परीक्षा को एक बड़े आयोजन का रूप दे दिया। सुबह निर्धारित समय से कई घंटे पहले ही विद्यालय की ओर आने वाले रास्तों पर छात्रों और उनके अभिभावकों की लंबी कतारें दिखाई देने लगीं।

प्रतिस्पर्धा का बढ़ता स्तर
इस वर्ष प्रवेश परीक्षा में केवल सुल्तानपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों से भी छात्र शामिल हुए। यह इस बात का प्रमाण है कि विद्यालय की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।छात्रों के बीच कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश पाने के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। अभिभावकों का मानना है कि बेहतर शिक्षा और संस्कार के लिए यह विद्यालय एक भरोसेमंद विकल्प बन चुका है।
स्वागत ने जीता दिल
प्रवेश परीक्षा में शामिल होने आए छात्रों और उनके अभिभावकों का विद्यालय परिसर में भव्य स्वागत किया गया।शंखध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच पुष्प वर्षा कर सभी का अभिनंदन किया गया। विद्यालय के आचार्य-आचार्याएं हाथों में फूलों की थाल लिए कतारबद्ध खड़े थे और प्रत्येक आगंतुक का स्वागत कर रहे थे।यह दृश्य किसी धार्मिक आयोजन से कम नहीं था, जहां शिक्षा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अभिभावक इस स्वागत से भावुक और प्रभावित नजर आए।
विद्यालय की बढ़ती लोकप्रियता
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस वर्ष प्रवेश परीक्षा में भाग लेने वाले छात्रों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक रही।इसका मुख्य कारण विद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही अत्याधुनिक आवासीय सुविधाएं और उत्कृष्ट शैक्षिक वातावरण है।विद्यालय न केवल शिक्षा पर ध्यान देता है, बल्कि छात्रों के समग्र विकास—संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों—पर भी विशेष जोर देता है। यही कारण है कि समाज में इसकी प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है।
प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर कई प्रमुख शिक्षाविद और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ राममनोहर,डॉ विनोद कुमार सिंह,भोलानाथ अग्रवाल,डॉ पवन कुमार सिंह,राकेश मणि त्रिपाठी,इन सभी ने छात्रों और अभिभावकों का स्वागत किया और परीक्षा की व्यवस्था का निरीक्षण भी किया।
नवरात्रि का विशेष संयोग
कार्यक्रम के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि यह आयोजन नवरात्रि के पावन समय में हो रहा है।डॉ राममनोहर ने कहा कि यह संयोग इस बात का प्रतीक है कि मां सरस्वती की कृपा विद्यालय पर बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति को भी महत्व दिया जाता है।
निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था
विद्यालय के प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।परीक्षा केंद्रों की कड़ी निगरानी अनुशासन बनाए रखने के लिए पर्याप्त स्टाफ छात्रों और अभिभावकों के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाउन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि किसी भी छात्र या अभिभावक को कोई असुविधा न हो।
आचार्य वर्ग का योगदान
प्रवेश परीक्षा के सफल आयोजन में विद्यालय के आचार्य-आचार्याओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वरिष्ठ आचार्य रमेश मिश्र और आचार्या रंजना पाण्डेय के नेतृत्व में पूरी टीम ने आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराया।इसके अलावा कई शिक्षकों और कर्मचारियों ने मिलकर परीक्षा को व्यवस्थित और सफल बनाया।
शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ता भरोसा
यह आयोजन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि समाज में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।अभिभावक अब ऐसे विद्यालयों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें संस्कार और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाती है।
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