Prayagraj Magh Mela: संतों के अपमान का आरोप, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे, कंप्यूटर बाबा भी समर्थन में उतरे

✍️By: Nation Now Samachar Desk
प्रयागराज माघ मेला: संतों के अपमान का आरोप, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे, कंप्यूटर बाबा भी समर्थन में उतरे

Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज: माघ मेले के दौरान प्रयागराज में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम नोज जाने से रोक दिया गया। इस घटना के बाद संतों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया।शंकराचार्य का आरोप है कि BJP सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संतों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

संगम नोज जाने को लेकर बढ़ा विवाद

दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ प्रयागराज संगम नोज जाना चाहते थे। लेकिन प्रशासन ने वहां अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इसी को लेकर उनके अनुयायियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।झड़प के बाद शंकराचार्य नाराज हो गए और उन्होंने धरने पर बैठने का फैसला किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

कंप्यूटर बाबा भी समर्थन में उतरे

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कंप्यूटर बाबा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने संतों के सम्मान को लेकर नाराजगी जताते हुए जमीन पर लेटकर धरना दिया। कंप्यूटर बाबा ने कहा कि संत समाज के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रशासन ने की समझाने की कोशिश

धरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और संतों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कहा कि संगम नोज पर भीड़ अत्यधिक होने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया था और इसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।हालांकि, संतों की नाराजगी देर तक बनी रही और काफी समय तक धरना चलता रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सियासी बयानबाजी तेज

इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। संत समाज और विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं और संतों की सुरक्षा सर्वोपरि है।फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन माघ मेले के दौरान यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है।

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