मुजफ्फरनगर: VIP ड्यूटी में शराब के नशे में धुत दरोगा का ड्रामा, बार-बार पूछता रहा “मैं कहां खड़ा हूं?”

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यशैली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला फुगाना थाने में तैनात दरोगा चोबसिंह से जुड़ा है, जो मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान VIP ड्यूटी पर तैनात थे। लेकिन इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के बीच जो कुछ हुआ, उसने न केवल वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।

बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान अचानक दरोगा की हालत बिगड़ गई। वह अपनी शर्ट उतारकर अधनंगे हालत में सड़क किनारे मिट्टी में लोटने लगे। यह दृश्य देखने वालों के लिए बेहद असामान्य और चौंकाने वाला था। उनकी पुलिस टोपी भी पास नहीं थी और उनका व्यवहार पूरी तरह असंतुलित नजर आ रहा था।घटना के दौरान दरोगा बार-बार एक ही सवाल दोहरा रहे थे – “मैं कहां पे खड़ा हूं?” यह सवाल उनकी मानसिक स्थिति को साफ तौर पर बयां कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनके चश्मे का एक शीशा भी गायब था और वह कभी मोबाइल देखते, तो कभी अचानक पेट के बल लेट जाते। कई बार तो वह वहीं लेटे-लेटे सो जाते और फिर अचानक उठकर अजीब हरकतें करने लगते।स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राहगीरों को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दरोगा को सड़क से हटाकर एक अहाते के अंदर पहुंचाया ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। इस दौरान यह भी सामने आया कि वह कई बार नियंत्रण खो बैठे और सार्वजनिक रूप से मूत्र-विसर्जन भी कर दिया, जिससे आसपास मौजूद लोगों में असहजता फैल गई।
कुछ समय बाद उनके साथी पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उन्होंने दरोगा को संभालने की कोशिश की। हालांकि, उस समय तक उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी। जब उनसे बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने शराब पी रखी है, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी स्थिति को समझ पाने में असमर्थ थे।
यह घटना कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि VIP ड्यूटी जैसे संवेदनशील कार्य में लगे पुलिसकर्मी की यह हालत कैसे हो सकती है? क्या ड्यूटी से पहले किसी तरह की जांच नहीं की जाती? और अगर की जाती है, तो इस तरह की चूक कैसे हो गई?
पुलिस विभाग की छवि पर भी इस घटना का असर पड़ना तय है। आम जनता पुलिस से सुरक्षा और अनुशासन की उम्मीद करती है, लेकिन जब इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो विश्वास डगमगा जाता है। खासकर तब, जब मामला किसी बड़े सरकारी कार्यक्रम से जुड़ा हो।सोशल मीडिया पर भी यह घटना तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे पुलिस की लापरवाही बता रहे हैं, तो कुछ इसे सिस्टम की कमजोरी के रूप में देख रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या संबंधित दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा?फिलहाल, यह घटना एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि जिम्मेदारी के पद पर बैठे लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सतर्क और अनुशासित रहने की जरूरत है। क्योंकि उनकी एक छोटी सी चूक भी पूरे सिस्टम की साख को प्रभावित कर सकती है।
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