Kanpur crime news: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश: 60 लाख में बिकती थी जिंदगी, डॉक्टरों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

Kanpur crime news: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस और जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में इस संगठित गिरोह के कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं। इस मामले में दो ओटी टेक्नीशियनों की गिरफ्तारी ने पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं, जबकि कई डॉक्टर अब भी फरार हैं।पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार के रूप में हुई है, जो क्रमशः गाजियाबाद और नोएडा के निजी अस्पतालों से जुड़े बताए जा रहे हैं। ये दोनों ऑपरेशन थिएटर में अहम भूमिका निभाते थे और अवैध ट्रांसप्लांट प्रक्रिया को अंजाम देने में मदद करते थे।

कैसे चलता था पूरा खेल?
जांच में सामने आया है कि यह रैकेट बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। पहले किडनी डोनर और मरीजों की पहचान की जाती थी। इसके बाद उनकी जांच एक जगह होती थी, जबकि सर्जरी किसी अन्य स्थान पर कराई जाती थी। ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज और डोनर को अलग-अलग नर्सिंग होम में शिफ्ट कर दिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो।दिल्ली एनसीआर के कई नर्सिंग होम्स में इस तरह के अवैध ऑपरेशन किए जाने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसमें कई बड़े डॉक्टर और सर्जन शामिल हो सकते हैं, जो अलग-अलग शहरों से बुलाए जाते थे।
60 लाख में ‘जिंदगी का सौदा’
इस पूरे रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसकी आर्थिक संरचना है। एक किडनी के बदले मरीज से करीब 60 लाख रुपये तक वसूले जाते थे, जबकि डोनर को केवल 8 से 9 लाख रुपये ही दिए जाते थे। बाकी रकम डॉक्टरों, दलालों और अन्य नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच बांट ली जाती थी।गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर या मजबूरी का फायदा उठाकर इस अवैध कारोबार में शामिल किया जाता था। इस वजह से यह मामला सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ भी गंभीर अपराध माना जा रहा है।
फरार डॉक्टरों पर शिकंजा
पुलिस ने इस मामले में चार फरार डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। पूछताछ में सामने आए नामों में डॉ. अफजल और डॉ. वैभव प्रमुख हैं, जिन पर बड़ी संख्या में अवैध ट्रांसप्लांट कराने का आरोप है। आशंका है कि ये डॉक्टर बड़े अस्पतालों से जुड़े हो सकते हैं।
जांच का दायरा बढ़ा
लखनऊ समेत कई शहरों में जांच का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस की कई टीमें अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं। STF, CMO और विजिलेंस विभाग मिलकर इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।डीसीपी पश्चिम के अनुसार, यह एक संगठित गिरोह है जो अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है। ऐसे में इसकी जांच भी बहुस्तरीय तरीके से की जा रही है।
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