कानपुर देहात पुलिस अधीक्षक ने रिक्रूट आरक्षियों से की बैठक, प्रशिक्षण और अनुशासन पर दिया जोर

कानपुर देहात में आज पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय ने जनपद की पुलिस लाइन्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक का उद्देश्य प्रशिक्षणरत आरक्षियों को मार्गदर्शन देना और उनके अनुभवों, समस्याओं तथा प्रशिक्षण प्रक्रिया की समीक्षा करना था।

प्रशिक्षण की महत्ता पर जोर
बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस का बुनियादी प्रशिक्षण उनकी करियर की सबसे महत्वपूर्ण नींव होती है। उन्होंने विशेष रूप से अनुशासन, कानून की जानकारी, संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग पर ध्यान देने का संदेश दिया।महोदया ने कहा, “एक सक्षम और जनता के प्रति समर्पित पुलिस अधिकारी बनने के लिए कठोर परिश्रम और आत्मानुशासन अत्यंत आवश्यक है। आप सभी भविष्य में जनपद की कानून व्यवस्था के स्तंभ बनेंगे, अतः अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें।”
प्रशिक्षुओं की समस्याओं और सुविधाओं की समीक्षा
पुलिस अधीक्षक ने प्रशिक्षणरत आरक्षियों से उनकी शैक्षणिक व्यवस्था, रहने-खाने की सुविधाओं, मैदानी अभ्यास और किसी भी प्रकार की आंतरिक समस्या के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने प्रशिक्षुओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।साथ ही उन्होंने प्रशिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं के शारीरिक और मानसिक विकास पर समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का डटकर सामना कर सकें।
अनुशासन और करियर निर्माण
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रशिक्षण अवधि का प्रभाव सिर्फ अब तक के ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशिक्षुओं के भविष्य के करियर और उनके पेशेवर रवैये का आधार भी बनती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्य प्रशिक्षण का अहम हिस्सा हैं।महिला और पुरुष प्रशिक्षुओं से समान व्यवहार और आत्मानुशासन के महत्व पर भी जोर दिया गया। यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि प्रशिक्षु न केवल कानूनी ज्ञान में प्रवीण हों, बल्कि जनता के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारी बनें।
आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण
बैठक में पुलिस अधीक्षक ने प्रशिक्षुओं को आधुनिक तकनीकों और साइबर, फोरेंसिक एवं मैदानी कार्यों में दक्ष बनने की प्रेरणा भी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग अब केवल कानून के ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी और साइबर कौशल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
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