कानपुर: तालाब की गंदगी पर फूटा गुस्सा: कानपुर में पूर्व पार्षद का जल सत्याग्रह, पुलिस ने कराया खत्म

✍️Amisha Sachan
कानपुर: तालाब की गंदगी पर फूटा गुस्सा: कानपुर में पूर्व पार्षद का जल सत्याग्रह, पुलिस ने कराया खत्म

उत्तर प्रदेश के कानपुर में तालाब की सफाई को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। जूही क्षेत्र में एक तालाब की बदहाल स्थिति से नाराज पूर्व पार्षद सुनील कनौजिया ने मंगलवार को अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने तालाब के बीच में बैठकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया, जिससे इलाके में हलचल मच गई।प्रदर्शन की शुरुआत आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद पूर्व पार्षद तालाब के अंदर उतर गए और पानी के बीच बैठकर विरोध जताने लगे। उनके साथ क्षेत्र के कुछ स्थानीय लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस आंदोलन का समर्थन किया।

सुनील कनौजिया का आरोप था कि तालाब में लंबे समय से गंदगी जमा है और इसकी सफाई के लिए कई बार नगर निगम के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि इस लापरवाही के कारण न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।स्थानीय निवासियों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तालाब की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वहां से बदबू आती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों ने प्रशासन से जल्द सफाई कराने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही जूही थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार पटेल ने अपनी टीम के साथ स्थिति को संभाला और प्रदर्शनकारियों से बातचीत शुरू की। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि इस तरह तालाब में बैठना उनके लिए खतरनाक हो सकता है।

काफी देर तक चली बातचीत के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित तरीके से तालाब से बाहर निकाला और जल सत्याग्रह को समाप्त कराया। हालांकि, प्रदर्शन खत्म होने के बाद भी लोगों की नाराजगी कम नहीं हुई।गौर करने वाली बात यह रही कि पूरे प्रदर्शन के दौरान नगर निगम का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे स्थानीय लोगों में और अधिक असंतोष फैल गया। लोगों का कहना है कि जब तक अधिकारी मौके पर आकर समस्या का समाधान नहीं करेंगे, तब तक ऐसे विरोध जारी रहेंगे।

यह घटना एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। शहर में जल स्रोतों की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है, लेकिन इस मामले में लापरवाही साफ नजर आ रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि जल स्रोतों की अनदेखी से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी जन्म देता है। ऐसे में प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है।

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