बाराबंकी : मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले

मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले

संवाददाता मुन्ना सिंह उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए लगाई गई आग एक बुजुर्ग की मौत का कारण बन गई। यह दर्दनाक हादसा त्रिवेदीगंज क्षेत्र के रौनी पंचायत स्थित गोतवन पुरवा में हुआ, जहां 65 वर्षीय राम औतार केवट की जिंदा जलकर मौत हो गई।

मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले
मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले

मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम राम औतार केवट त्रिवेदीगंज बाजार से अपने गांव गोतवन पुरवा लौट रहे थे। जैसे ही वे रौनी गांव के पास पहुंचे, अचानक मधुमक्खियों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों के हमले से घबराए राम औतार ने खुद को बचाने के लिए पास में खड़े सूखे खर-पतवार में आग लगा दी, ताकि धुएं से मधुमक्खियां दूर हो जाएं।

हालांकि, यह प्रयास उनके लिए घातक साबित हुआ। आग लगाने के बावजूद मधुमक्खियों का हमला नहीं रुका। लगातार डंक मारने से राम औतार की हालत बिगड़ने लगी और वे बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। दुर्भाग्यवश, वे जलते हुए खर-पतवार की आग में गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।घटना के बाद राम औतार देर शाम तक घर नहीं लौटे। जब परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, तो उन्हें घटनास्थल पर जला हुआ शव मिला। यह दृश्य देखकर परिजन बदहवास हो गए और गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला दुर्घटना का प्रतीत होता है, लेकिन हर पहलू से जांच की जा रही है। ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल का निरीक्षण भी किया गया है।इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में मधुमक्खियों के हमलों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खियों के हमले की स्थिति में आग लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है, खासकर जब आसपास सूखी घास या ज्वलनशील पदार्थ मौजूद हों। ऐसे हालात में जमीन पर लेट जाना, कपड़े से चेहरा ढंकना या धीरे-धीरे वहां से दूर हटना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में पहले भी मधुमक्खियों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन कभी इतनी भयावह घटना नहीं हुई। प्रशासन से मांग की जा रही है कि गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग ऐसी परिस्थितियों में सही कदम उठा सकें।

राम औतार केवट की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वह परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे और उनकी मौत से परिवार पर आर्थिक संकट भी गहरा गया है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *