विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भावुक: बोले- राजनीति अंतिम चरण में, तय करूंगा इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं

यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र का आज तीसरा दिन है. सदन शुरू होने से पहले विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्ष के आचरण पर गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से उन्होंने विधानसभा और विधायकों की गरिमा बढ़ाने का लगातार प्रयास किया है, लेकिन मंगलवार को सदन में जो घटनाक्रम हुआ, उसने उन्हें आहत किया है. कई दशकों से समाज में विधायिका और विधायकों की जो छवि बनी हुई थी, उसे बदलने की कोशिश उन्होंने की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और विपक्ष सरकार की प्रशंसा करने नहीं, बल्कि उसका ध्यान जनहित के मुद्दों की ओर आकर्षित करने के लिए सदन में आता है.
उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों में विपक्ष ने अपनी बात रखने की परंपरा का पालन किया और समय-समय पर अपनी बात कहकर सदन से बाहर गया लेकिन मंगलवार को जो हुआ, उससे उन्हें गहरी निराशा हुई. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘कल ऐसे सदस्य ने मुझे आहत किया, जिसे हम रोल मॉडल मानते थे. यह अत्यंत निराशाजनक है.’ भावुक होते हुए कहा, ‘मुझे इस बात पर विचार करना पड़ेगा कि मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं. पिछले साढ़े चार वर्षों में जो प्रयास मैंने किए, वे उचित थे या अनुचित. मैं इस पर आत्ममंथन करूंगा और शीघ्र ही निर्णय लूंगा.’
इससे पूर्व कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा, ‘कल जो भी घटनाक्रम हुआ, ऐसा पहले भी होता रहा है. जब आप विपक्ष में बैठे थे, तब भी सभी लोग इसके गवाह हैं. आपसे मेरा अनुरोध है कि हमारे सदस्य सचिन यादव को निष्कासित करने का जो निर्णय लिया गया है, उसे वापस लिया जाए. सचिन यादव ने अभी-अभी राजनीति में प्रवेश किया है. वह सदन में अपनी बात रख रहे थे. हमारी मांग केवल इतनी थी कि उनकी बात सुन ली जाए. इसलिए आपसे अनुरोध है कि उनके निष्कासन का निर्णय वापस लें.’
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘समाजवादी पार्टी एक ऐसी पॉलिटिकल पार्टी है जिसने कभी भी डेमोक्रेटिक परंपराओं या सिस्टम की कोई इज्ज़त नहीं की; कल असेंबली के अंदर पार्टी ने जिस तरह से बर्ताव किया, उसकी कड़ी निंदा की जाती है. SP मेंबर्स ने चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ को अंदर नहीं जाने दिया… इससे पता चलता है कि वे सिर्फ़ हाउस का टाइम बर्बाद करना चाहते हैं. उन्हें राज्य के लोगों की कोई फिक्र नहीं है. जो लोग बाबर या बाबरी मस्जिद को सपोर्ट करते हैं, उन्हें श्री राम जन्मभूमि से जुड़े मामलों पर बोलने का कोई मोरल हक नहीं है, चाहे वह चढ़ावा हो, डोनेशन हो, या मंदिर बनाना हो… समाजवादी पार्टी को 2027 में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, और इसका पूरी तरह खत्म होना तय है.’
मंत्री ओपी राजभर ने कहा, ‘विधानसभा सुचारु रूप से चलेगी. सपा के लोग चर्चा से भाग रहे हैं. सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. चर्चा होगी तो इन लोगों की पोल खुल जाएगी. चाहे वे पेपर लीक का मामला हो. 5 साल इनकी सरकार थी, 5 साल में परीक्षा के पेपर बिकते थे…पूरे देश से परीक्षा देने लोग उत्तर प्रदेश में आते थे इतनी नकल होती थी.’
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