संवाददाता शिवाकांत दीक्षित, सीतापुर सीतापुर जिले के विकासखंड हरगांव की ग्राम पंचायत राही से मनरेगा योजना में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। गरीब मजदूरों को रोजगार देने के लिए बनी इस योजना में ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक की मिलीभगत से फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरों के हक पर डाका डाले जाने की गंभीर शिकायतें मिली हैं।

गांव के अंदर मनरेगा कार्य कागजों में तो दिखते हैं, लेकिन जमीन पर इनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं मिलता। मजदूरों का आरोप है कि बिना काम कराए उनके नाम से हाजिरी चढ़ाई जा रही है और बैंक खातों में पैसा डालकर बाद में निकाल लिया जाता है। यह खेल लंबे समय से चल रहा है, जिससे गरीब मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।

ताज़ा मामले में ग्राम पंचायत राही की जाँच के दौरान 83 मजदूरों की फर्जी हाजिरी सामने आई है। पूछताछ में ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक के बयान भी मेल नहीं खाते। प्रधान जहां कह रहे हैं कि “काम कल से शुरू हुआ है”, वहीं रोजगार सेवक का कहना है कि “आज बारिश के कारण काम नहीं हुआ।” दोनों के अलग-अलग बयान संदेह को और गहरा करते हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ राही पंचायत में ही नहीं, बल्कि जनपद के कई विकासखंडों में मनरेगा में धांधली का बड़ा खेल लगातार चल रहा है। मजदूरों के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट खुलेआम किया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर मनरेगा विभाग के अधिकारी ने कहा कि “मामला संज्ञान में आया है, जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।” ग्रामीणों ने मांग की है कि मनरेगा कार्यों की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, ताकि मजदूरों के हक की सुरक्षा हो सके।
