कोर्ट से राहत मिलते ही पुराने रंग में लौटे बृजभूषण, बोले- ‘मैंने खुद को कभी मुजरिम माना ही नहीं’

✍️NNS Desk
कोर्ट से राहत मिलते ही पुराने रंग में लौटे बृजभूषण, बोले- ‘मैंने खुद को कभी मुजरिम माना ही नहीं’

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में बरी होने के बाद पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने इसे सच की जीत बताया. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद को आरोपी नहीं माना और वर्षों से गरीबों व जूनियर खिलाड़ियों की लड़ाई लड़ते रहे हैं. मामले में बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 18 जनवरी 2023 को ही उन्होंने इसे साजिश और षड्यंत्र बताया था. उन्होंने कहा कि उस दिन मैंने साफ कहा था कि यह साजिश है. अगर आरोप सिद्ध हो जाते तो मैं फांसी पर लटकने के लिए भी तैयार था. आज मैं बरी हो गया हूं.

दरअसल, फैसला आने के तुरंत बाद मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया है और उनका सच सामने आ गया है.

— ANI (@ANI) August 3, 2026

रामचरितमानस की चौपाई से दिया संदेश: कोर्ट के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने रामचरितमानस की चौपाई ‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा’ का जिक्र करते हुए कहा कि अंततः वही होता है जो भगवान राम की इच्छा होती है. उन्होंने इसे अपने संघर्ष के अंत में मिली न्यायिक राहत बताया और फैसले पर संतोष जताया.

अपने पुराने बयान को याद करते हुए बृजभूषण ने कहा: 18 जनवरी 2023 के उस दौर को याद करते हुए जब मेरे खिलाफ साजिश और षड्यंत्र रचे जा रहे थे, मैंने तब भी कहा था कि आरोप सिद्ध होने पर फांसी पर लटक जाऊंगा. आज आखिरकार मैं बरी हो गया हुन. पिछले 15-16 सालों से मैं गरीबों और जूनियर खिलाड़ियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा हूं और मैंने कभी खुद को आरोपी नहीं माना. उस वक्त मेरी फांसी की मांग की जा रही थी, प्रियंका गांधी जंतर-मंतर पर आ गईं. वहां खाने-पीने की व्यवस्था कर ली थी. हम यह लड़ाई जीत चुके हैं और अब नया परचम लहराएंगे.

आरोपों और विवादों का पूरा बैकग्राउंड: यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब देश के जाने-माने पहलवानों ने WFI के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे. इस विवाद ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं. लंबे समय तक जंतर-मंतर पर पहलवानों का धरना-प्रदर्शन चला, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और मामला दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पहुंचा. सोमवार को अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें इन सभी आरोपों से मुक्त कर दिया.

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