कानपुर देहात : अकबरपुर में परशुराम जयंती पर भव्य विप्रा संगम व संत पूजन, संतों के सानिध्य में गूंजा धार्मिक संदेश

✍️Amisha Sachan
कानपुर देहात : अकबरपुर में परशुराम जयंती पर भव्य विप्रा संगम व संत पूजन, संतों के सानिध्य में गूंजा धार्मिक संदेश

कानपुर देहात के अकबरपुर कस्बे में भगवान परशुराम जयंती के पावन अवसर पर इस वर्ष एक भव्य और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। भार्गव परशुराम सेवा समिति द्वारा आयोजित “विप्रा संगम एवं संत पूजन” कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विप्र समाज के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरा आयोजन धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार और संतों के सानिध्य ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई प्रतिष्ठित संत-महात्माओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। प्रमुख संतों में महावीर दास ब्रह्मचारी जी महाराज (हनुमान मंदिर, परीछा धाम, झांसी), मदन कुमार दास जी महाराज (चित्रकूट धाम) तथा महंत देवनारायण दास जी महाराज (गौरियापुर आश्रम) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

— NATION NOW समाचार (@nnstvlive) April 19, 2026

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत संतों के पूजन-अर्चन से हुई। आयोजकों एवं श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और उन्हें पुष्पमाला, वस्त्र एवं सम्मान भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में धर्म, संस्कृति और समाज के संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा आध्यात्मिकता और परंपराओं में निहित है, जिसे बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और समाज में नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाएं।कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने भी समाज में एकता और समरसता बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि ये सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता के महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।

आयोजकों ने बताया कि भार्गव परशुराम सेवा समिति का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना का विस्तार करना और परंपराओं को जीवंत बनाए रखना है। समिति समय-समय पर ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य करती रहती है।

कार्यक्रम के अंत में भंडारे एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।अकबरपुर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बना। भगवान परशुराम जयंती के इस पावन अवसर ने क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा का वातावरण और अधिक सुदृढ़ कर दिया।

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