UP Poshan Aahar Tender Scam: Karodon Ke Tender Par Uthe Gambhir Sawal, Bachchon Aur Garbhvati Mahilaon Ke Poshan Par Sankat?

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले पोषण आहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा विधान परिषद सदस्य डॉ. रतनपाल सिंह और जयपाल सिंह व्यस्त ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पिछले दो महीनों से टेक-होम राशन (THR) नहीं मिला है। आरोपों के मुताबिक, हजारों करोड़ रुपये के पोषण आहार टेंडर में अनियमितताएं हुई हैं और सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है, जबकि विपक्ष और सामाजिक संगठन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
आरोपों के अनुसार प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए टेक-होम राशन की आपूर्ति में भारी देरी हुई है। यह राशन विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
भाजपा एमएलसी का दावा है कि:
- अप्रैल और मई महीने में लाभार्थियों को राशन नहीं मिला।
- आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण सामग्री नहीं पहुंची।
- लाखों लाभार्थी प्रभावित हुए।
- सप्लाई प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के अनुसार शुरू नहीं हुई।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू टेंडर प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप हैं।
एमएलसी ने दावा किया है कि:
- पोषण आहार का बड़ा टेंडर जारी किया गया था।
- टेंडर ऐसी कंपनी को दिया गया जिस पर पहले भी सवाल उठ चुके थे।
- गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर पूर्व में विवाद सामने आए थे।
- टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों की अनदेखी की गई।
इन आरोपों के बाद पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
किन उत्पादों की सप्लाई होनी थी?
आरोपों के अनुसार टेंडर मिलने के बाद निर्धारित समय के भीतर कई प्रकार के पोषण उत्पादों की आपूर्ति शुरू हो जानी चाहिए थी।
इनमें शामिल बताए गए उत्पाद:
- आटा
- बेसन
- हलवा मिश्रण
- बेसन बर्फी
- दलिया
- मूंग-सोया खिचड़ी
- अन्य पोषण सामग्री
दावा किया गया है कि इन उत्पादों की सप्लाई तय समय पर शुरू नहीं हुई, जिससे लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
लाखों बच्चों और महिलाओं पर असर का दावा
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इससे जुड़े लाभार्थियों में समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग शामिल हैं।
प्रमुख लाभार्थी
- छह वर्ष तक के बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- धात्री माताएं
- कुपोषण से प्रभावित परिवार
विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण योजनाओं में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसी वजह से मामले को केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय भी माना जा रहा है।
NAFED और ICDS की भूमिका पर भी सवाल
भाजपा एमएलसी ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि:
- निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही।
- सप्लाई में देरी के बावजूद जवाबदेही तय नहीं हुई।
- टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं।
- लाभार्थियों तक सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था प्रभावित हुई।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
कार्डेलाइजेशन और नियमों की अनदेखी के आरोप
मामले में कथित कार्डेलाइजेशन (Cartelization) का मुद्दा भी उठाया गया है। एमएलसी का आरोप है कि:
- टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
- नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
- सप्लाई व्यवस्था में गंभीर खामियां रहीं।
- लाभार्थियों के हितों को नुकसान पहुंचा।
इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने की जांच की मांग
मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
उनकी प्रमुख मांगें:
- टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच।
- सप्लाई में हुई देरी की समीक्षा।
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।
- लाभार्थियों को तत्काल पोषण आहार उपलब्ध कराना।
- भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करना।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों पर संबंधित विभागों और कथित तौर पर जुड़ी कंपनी की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसे में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वर्तमान में उपलब्ध जानकारी आरोपों और दावों पर आधारित है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया और संभावित जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
क्यों अहम है यह मामला?
उत्तर प्रदेश की पोषण योजनाएं लाखों परिवारों से जुड़ी हुई हैं। यदि सप्लाई व्यवस्था में किसी प्रकार की बाधा आती है तो उसका असर सीधे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
यही कारण है कि यह मामला:
- सार्वजनिक स्वास्थ्य
- महिला एवं बाल कल्याण
- सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता
- प्रशासनिक जवाबदेही
जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ जाता है।
Conclusion
उत्तर प्रदेश में टेक-होम राशन और पोषण आहार आपूर्ति को लेकर लगाए गए आरोपों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा एमएलसी द्वारा टेंडर प्रक्रिया, सप्लाई में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए गए सवालों ने सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि फिलहाल ये आरोप जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखा जाएगा। अब सभी की नजर संभावित जांच और विभागीय जवाब पर टिकी हुई है।
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