Kanpur Ambedkar hoarding controversy: अंबेडकर जयंती से पहले कानपुर में बवाल: होर्डिंग में ‘परिनिर्वाण दिवस’ लिखने पर भड़के कार्यकर्ता

✍️Amisha Sachan
Kanpur Ambedkar hoarding controversy: अंबेडकर जयंती से पहले कानपुर में बवाल: होर्डिंग में ‘परिनिर्वाण दिवस’ लिखने पर भड़के कार्यकर्ता

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बिल्हौर क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती से ठीक पहले एक होर्डिंग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस होर्डिंग में जयंती के स्थान पर ‘परिनिर्वाण दिवस’ और ‘विनम्र श्रद्धांजलि’ जैसे शब्द लिखे जाने से स्थानीय राजनीति गरमा गई है और विभिन्न संगठनों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

यह होर्डिंग क्षेत्रीय विधायक राहुल बच्चा सोनकर की ओर से लगवाया गया बताया जा रहा है। जैसे ही यह होर्डिंग सार्वजनिक रूप से सामने आया, सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। लोगों ने इसे एक गंभीर चूक बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी।दरअसल, 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है, जिसे देशभर में बड़े सम्मान के साथ मनाया जाता है। वहीं ‘परिनिर्वाण दिवस’ 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि के रूप में जाना जाता है। ऐसे में जयंती के अवसर पर ‘परिनिर्वाण दिवस’ लिखे जाने को लेकर लोगों में नाराजगी स्वाभाविक रूप से बढ़ गई।

इस मामले में सपा कार्यकर्ताओं, दलित नेताओं और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध जताया। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने इसे बाबा साहब का अपमान बताते हुए विधायक के खिलाफ प्रदर्शन किया। विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि इस तरह की गलती न केवल असंवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश भी जाता है। उनका कहना था कि बाबा साहब जैसे महान व्यक्तित्व के सम्मान में इस प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने इसे राजनीतिक लापरवाही बताया, तो कुछ ने इसे जानबूझकर की गई गलती तक करार दिया। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि यह एक मानवीय त्रुटि हो सकती है, लेकिन इतने संवेदनशील विषय में ऐसी गलती भी गंभीर मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां सामाजिक और राजनीतिक समीकरण काफी संवेदनशील होते हैं, इस तरह की घटनाएं बड़ा रूप ले सकती हैं। खासकर जब मामला डॉ. अंबेडकर से जुड़ा हो, जिनका दलित समाज और भारतीय संविधान में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच की बात कही जा रही है। यह देखना अहम होगा कि क्या इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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