4 साल की सत्या ने रचा इतिहास, यमुना पार कर बनी प्रयागराज की ‘नन्हीं जलपरी’

✍️Amisha Sachan
4 साल की सत्या ने रचा इतिहास, यमुना पार कर बनी प्रयागराज की ‘नन्हीं जलपरी’

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान और प्रेरित कर दिया है। नैनी इलाके के महेवा गांव की रहने वाली 4 साल की सत्या भारती ने अपने चौथे जन्मदिन पर ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे बड़े-बड़े तैराक भी चुनौती मानते हैं।इस नन्हीं बच्ची ने यमुना नदी को तैरकर पार किया और यह दूरी करीब 900 मीटर की थी। सत्या ने यह सफर ब्रेस्ट स्टाइल स्विमिंग में महज 21 मिनट 28 सेकंड में पूरा किया।

खेल-कूद की उम्र में बड़ा कारनामा

जहां इस उम्र के बच्चे आमतौर पर खिलौनों और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं सत्या भारती ने अपनी मेहनत और लगन से एक अलग पहचान बनाई है। खास बात यह है कि सत्या अभी स्कूल भी नहीं जाती हैं और उनके दूध के दांत तक नहीं टूटे हैं।इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए गर्व की बात बन गया है।

कैसे शुरू हुआ सफर?

सत्या के पिता देवेंद्र भारती ने बताया कि उनकी बेटी को बचपन से ही पानी में खास रुचि थी। धीरे-धीरे उन्होंने उसे तैराकी की बुनियादी ट्रेनिंग देनी शुरू की।शुरुआत में यह सिर्फ खेल के तौर पर था, लेकिन सत्या की तेजी से सीखने की क्षमता और पानी में आत्मविश्वास को देखकर परिवार ने उसे नियमित अभ्यास कराना शुरू किया।

रिकॉर्ड जैसी उपलब्धि

900 मीटर की दूरी को 21 मिनट 28 सेकंड में पूरा करना किसी भी प्रशिक्षित तैराक के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में 4 साल की बच्ची द्वारा यह कारनामा करना अपने आप में एक रिकॉर्ड जैसा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, सत्या ने बिना किसी डर के पूरे आत्मविश्वास के साथ नदी को पार किया।

लोगों की प्रतिक्रिया

सत्या की इस उपलब्धि के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग उसे “नन्हीं जलपरी” कहकर बुला रहे हैं।सोशल मीडिया पर भी उसकी कहानी तेजी से वायरल हो रही है और लोग उसकी हिम्मत और मेहनत की सराहना कर रहे हैं।खेल विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी उम्र में बच्चों को खेलों से जोड़ना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद फायदेमंद होता है। हालांकि, इतनी कम उम्र में नदी जैसी जगह पर तैराकी कराना पूरी सुरक्षा और निगरानी के साथ ही किया जाना चाहिए।जहां सत्या की उपलब्धि प्रेरणादायक है, वहीं यह भी जरूरी है कि इस तरह के प्रयास पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ किए जाएं। नदी में तैराकी करना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए प्रशिक्षकों और सुरक्षा टीम की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है।

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